
राजस्थान की पहचान और मरुस्थल की जीवनरेखा 'खेजड़ी' को अब कानून की शक्ति मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में ऐतिहासिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदेश में खेजड़ी की कटाई रोकने और इसके संरक्षण के लिए एक विशेष कानून (Khejri Conservation Law) लाया जाएगा। इस घोषणा से न केवल बिश्नोई समाज बल्कि पर्यावरण प्रेमियों में ख़ुशी की लहर है। रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में संतों ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए इसे 'पर्यावरण संरक्षण का राजस्थान मॉडल' करार दिया।
मुकाम पीठाधीश्वर श्री रामानन्द जी महाराज ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि आजादी के बाद यह पहली बार है जब किसी सरकार ने खेजड़ी की रक्षा के लिए इतना कठोर और समर्पित कदम उठाने का साहस दिखाया है। उन्होंने कहा कि 70 वर्षों से समाज इस तरह के कानून की मांग कर रहा था।
संतों ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री ने अगस्त 2025 में जो आश्वासन दिया था, उसे 5 फरवरी 2026 को विधानसभा में पूरा कर अपनी 'कथनी और करनी' की एकरूपता सिद्ध कर दी है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार खेजड़ी और पर्यावरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भगवान जम्भेश्वर जी के 29 नियमों और माँ अमृता देवी के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि "जीव दया पालनी, रुख लीलौ नहीं घावै" का संदेश ही सरकार की नीति का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से प्रेरणा लेकर राजस्थान 5 वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने की ओर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने पर्यावरण प्रेमी संतों एवं प्रतिनिधियों से सुझाव लेते हुए खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाने का आश्वासन दिया था। इसी दिशा में हमने विधानसभा में घोषणा की है और संतों के सुझाव के अनुरूप ही इसकी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि खेजड़ी संरक्षण के लिए शीघ्र कानून लाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, नया 'खेजड़ी संरक्षण कानून' बेहद सख्त होगा। इसमें मुख्य प्रावधान ये हो सकते हैं:
हाल के दिनों में ओसियां और बीकानेर क्षेत्रों में सोलर प्लांट की आड़ में खेजड़ी की कटाई को लेकर 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन' तेज हुआ था। मुख्यमंत्री की इस घोषणा को उसी जन-आक्रोश के सकारात्मक समाधान के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य विकास (Solar Energy) और विरासत (Khejri) के बीच संतुलन बनाना है, ताकि राजस्थान की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचाए बिना ऊर्जा क्षेत्र में प्रगति की जा सके।
इस अभिनंदन समारोह में बालोतरा, बाड़मेर, नागौर, बीकानेर, जोधपुर और श्रीगंगानगर जैसे जिलों से बिश्नोई समाज की महिलाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया। उद्योग मंत्री के.के. विश्नोई और जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई ने भी इस कानून को राज्य के पारिस्थितिक तंत्र के लिए 'संजीवनी' बताया।
Published on:
09 Feb 2026 10:19 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
