9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘ये तो राजस्थान के लिए शुभ संकेत हैं…’, गरमाई सियासत के बीच Ex CM अशोक गहलोत ने क्यों कहा ऐसा? 

गहलोत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में एक गंभीर मुद्दे को लेकर सियासी पारा गरमाया हुआ है।

2 min read
Google source verification
ashok gehlot on khejri

राजस्थान में विकास और प्रकृति के बीच संतुलन की बहस अब सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पहुँच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीकानेर में चल रहे 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन' का खुला समर्थन करते हुए इसे एक सराहनीय कदम बताया है। गहलोत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और जालौर जैसे पश्चिमी राजस्थान के जिलों में सोलर प्लांट के नाम पर हजारों की संख्या में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के आरोप लग रहे हैं।

"ये शुभ संकेत हैं...": गहलोत

अशोक गहलोत ने अपने संदेश की शुरुआत पर्यावरण चेतना की प्रशंसा से की। उन्होंने कहा कि पहले अरावली और अब खेजड़ी बचाने के लिए जिस तरह से आमजन, संतगण और बिश्नोई समाज सड़कों पर उतरा है, वह राजस्थान के भविष्य के लिए शुभ संकेत है। गहलोत ने तर्क दिया कि यदि आज हम प्रकृति के लिए नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।

अमृता देवी का बलिदान और पर्यावरण का 'इतिहास'

गहलोत ने बिश्नोई समाज की आराध्य अमृता देवी और 363 शहीदों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि पेड़ों को बचाने के लिए जान देना हमारे इतिहास का गौरवपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उसी प्रेरणा को आज फिर से जीवित करने की आवश्यकता है।

गहलोत ने वैश्विक संदर्भ देते हुए ग्लोबल वार्मिंग पर चिंता जताई और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए वैश्विक आह्वान का भी जिक्र किया।

सोलर प्लांट: विकास की जरूरत या विनाश का बहाना?

पश्चिमी राजस्थान में सौर ऊर्जा (Solar Energy) के विस्तार को गहलोत ने जरूरी तो माना, लेकिन इसकी कीमत पर उठ रहे सवालों को भी जायज ठहराया। उन्होंने कहा:

अंधाधुंध कटाई: सोलर प्लांट की आड़ में लाखों खेजड़ी के पेड़ों का कटना चिंताजनक है।

जलवायु संतुलन: पेड़ों के घटने से पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में गर्मी और सर्दी का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे आम आदमी को 'लू' और भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।

सरकारी नीति: गहलोत ने मांग की कि सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए कि किस हद तक पेड़ों की बलि दी जाएगी।

'मुख्यमंत्री खुद करें हस्तक्षेप'

गहलोत ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने जो ट्री प्रोटेक्शन एक्ट (Tree Protection Act) बनाने का वादा किया है, उसे तुरंत पूरा करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि वे खुद आंदोलनकारियों को बुलाकर बातचीत करें और इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें।

उन्होंने कहा, 'खाली बीकानेर में आंदोलन से काम नहीं चलेगा, हर नागरिक को अपने क्षेत्र में संगोष्ठियां और चर्चाएं कर पर्यावरण के प्रति सोच पैदा करनी होगी।"