
जयपुर: राजस्थान के शहरों में लगातार बढ़ता ट्रैफिक जाम अब बीते कल की बात होने वाली है। वित्त मंत्री दिया कुमारी ने बजट में घोषणा की है कि प्रदेश के सभी 10 संभागीय मुख्यालयों (जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर, सीकर, पाली और बांसवाड़ा) को 'सिग्नल फ्री' बनाने के लिए 'कंप्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान' (CMP) लागू किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 2300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे, जिसमें अकेले राजधानी जयपुर के विकास के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
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यह केवल सड़कों को चौड़ा करने का काम नहीं है, बल्कि एक डेटा-संचालित आधुनिक शहरी परिवहन योजना है। इसके तहत प्रत्येक संभागीय मुख्यालय की भौगोलिक स्थिति और ट्रैफिक डेंसिटी का अध्ययन किया जाएगा।
शहरों को सिग्नल फ्री करने का सबसे बड़ा जरिया है—बिना रुके निकलने का रास्ता। बजट में घोषणा की गई है कि सभी संभागों के मुख्य जंक्शन्स पर:
राजधानी जयपुर में ट्रैफिक की समस्या सबसे जटिल है। इसे देखते हुए कुल 2300 करोड़ के बजट में से 1000 करोड़ रुपये केवल जयपुर के लिए आवंटित किए गए हैं। संभावना है की है कि जयपुर के व्यस्ततम इलाकों जैसे अजमेर रोड, टोंक रोड और सीकर रोड पर नए ट्रैफिक मॉडल्स लागू किए जाएंगे। 'स्मार्ट मोबिलिटी' के जरिए जयपुर को वैश्विक स्तर के महानगरों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
सिग्नल फ्री सड़कें होने से केवल जाम ही खत्म नहीं होगा, बल्कि इसके कई दूरगामी फायदे होंगे:
वित्त मंत्री दिया कुमारी ने स्पष्ट किया कि 'विकसित राजस्थान' के लिए शहरों का 'फास्ट और स्मूथ' होना जरूरी है। इस 2300 करोड़ के निवेश से संभागों में न केवल कंक्रीट का ढांचा खड़ा होगा, बल्कि तकनीक (IT) के जरिए ट्रैफिक को रेगुलेट किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट राजस्थान को शहरी नियोजन (Urban Planning) के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा कर देगा।
Updated on:
11 Feb 2026 12:24 pm
Published on:
11 Feb 2026 12:22 pm
