
पत्रिका संवाद कार्यक्रम के दौरान झोटवाड़ा व्यापार मंडल के पदाधिकारी नशा मुक्ति के लिए शपथ लेते हुए (फोटो: पत्रिका)
जयपुर शहर का सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र झोटवाड़ा आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। सड़कों की खराब हालत, अधूरी नालियां, जलभराव, स्ट्रीट लाइट की कमी और सफाई व्यवस्था का अभाव यहां के उद्यमियों और श्रमिकों के लिए रोजमर्रा की बड़ी समस्या बन चुके हैं।
गुरुवार को राजस्थान पत्रिका के झालाना कार्यालय में आयोजित पत्रिका संवाद कार्यक्रम में इस औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों और एसोसिएशन पदाधिकारियों ने इन मुद्दों को खुलकर उठाया। उनका कहना था कि वे नियमित रूप से टैक्स जमा करते हैं। हजारों लोगों को रोजगार देने के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान भी दे रहे हैं, लेकिन जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
उद्योगों को एनओसी नहीं मिलने, रीको क्षेत्र में नगर निगम की ओर से यूडी टैक्स के नोटिस देने और सुविधाएं विकसित नहीं करने, नो-एंट्री का सीमित समय, श्रमिकों के लिए इलाज और उनके बच्चों की शिक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई।
सड़क, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है। रीको उद्यमियों को कोई भी एनओसी नहीं दे रहा है, जबकि सरकार की ओर से स्टे हट चुका है। इससे उद्यमियों को दिक्कत आती है।
आनंद गुप्ता, अध्यक्ष, इंडस्ट्रियल एरिया मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन, झोटवाड़ा
उद्योगपति हमेशा सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार रहते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जाता। कई उद्योगों को एनओसी नहीं मिल रही, जिससे उद्योग संचालन में दिक्कत आ रही है।
आलोक गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष
कहीं डामर तो कहीं सीमेंट की सड़कें हैं, जिससे यातायात और रखरखाव दोनों में समस्या आती है। सरकार इस क्षेत्र में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराए।
राजेंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष
नालियां अधूरी बनी हुई हैं और पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। बरसात के दिनों में सड़कों पर पानी भर जाता है और सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं। जब तक सही ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनेगा, तब तक सड़कें भी टिकाऊ नहीं रहेंगी।
सूर्यकांत गाडिया, महासचिव
औद्योगिक क्षेत्र में भी नगर निगम यूडी टैक्स के नोटिस दे रहा है, जबकि नगर निगम की ओर से कोई सुविधा विकसित नहीं की जा रही।
प्रतीक जैन, सचिव
जयपुर में एक ही ईएसआइ डिस्पेंसरी है। आस-पास के निजी अस्पतालों को ईएसआइ से जोड़ा जाए, ताकि श्रमिकों को समय पर इलाज मिल सके। श्रमिकों के बच्चों को आरटीई के तहत स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल पाता। सरकार को इन योजनाओं में श्रमिक परिवारों को शामिल करने पर विचार करना चाहिए।
मनोज बियानी, उद्यमी
नो-एंट्री का समय उद्योगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। दिन में भी भारी वाहनों के प्रवेश की अनुमति मिलनी चाहिए। इन समस्याओं के चलते कई बड़ी कंपनियां यहां से उद्योग बंद कर दूसरे क्षेत्रों में जा रही हैं।
दीपक सोमानी, उद्यमी
क्षेत्र हजारों लोगों को रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान भी दे रहा है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सुनील गुप्ता, उद्यमी
सड़कों की हालत खराब है। जगह-जगह गड्ढे होने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है और माल ढुलाई भी प्रभावित होती है। जलभराव की बड़ी समस्या है, जिससे उद्योगों और कर्मचारियों को परेशानी होती है।
धीरू सिंह शेखावत, उद्यमी
उद्योगपति नियमित रूप से टैक्स का भुगतान करते हैं और ईएसआइ व पीएफ जैसी योजनाओं में भी योगदान देते हैं, लेकिन उन्हें सुविधाएं नहीं मिलतीं। सुविधाएं मिलें तो इंडस्ट्री में अधिक रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
ओमप्रकाश सिंह, उद्यमी
उद्योगों के लिए बेहतर बिजनेस इको-सिस्टम विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार, उद्योग जगत और रीको के बीच नियमित संवाद होना चाहिए, ताकि समस्याओं का समाधान निकाला जा सके और नए निवेश को बढ़ावा मिले।
मोहित गुप्ता, उद्यमी
प्रदूषण और बुनियादी समस्याओं के कारण नए व्यापारी यहां उद्योग स्थापित करने से कतराते हैं। करीब 30 साल पहले भी यहां ऐसी ही समस्याएं थीं और आज भी स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है।
रणजीत सिंह चावला, उद्यमी
Updated on:
13 Mar 2026 08:15 am
Published on:
13 Mar 2026 08:14 am
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