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JJM Scam Rajasthan: जेजेएम बिल्डिंग का ‘कमीशन काल’; जब शाम ढलते ही पोर्च में लगती थी ‘कैश वैन’

ender Fraud: राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन में अब कई खुलासे हो रहे हैं। साल 2022-2023 के दौरान इरकॉन कंपनी के फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्रों से टेंडर लेने वाली फर्मों और इंजीनियरों के बीच जल भवन स्थित जेजेएम बिल्डिंग में कमीशन का खुला खेल चलता था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ

प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ

Tender Fraud: राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन में अब कई खुलासे हो रहे हैं। साल 2022-2023 के दौरान इरकॉन कंपनी के फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्रों से टेंडर लेने वाली फर्मों और इंजीनियरों के बीच जल भवन स्थित जेजेएम बिल्डिंग में कमीशन का खुला खेल चलता था।
शाम 6 से 8 बजे के बीच होने वाले इस खेल को लेकर मंगलवार को एसीबी की कार्रवाई के बाद अब बिल्डिंग में सन्नाटा है। चश्मदीदों का कहना है कि जेजेएम ​बिल्डिंग में 'कैश वैन' पहुंचने के बाद फाइलें खुद चलकर गाड़ियों तक आती थी।

इंजीनियरों ने बताई आंखों देखी

उस समय तैनात रहे कुछ इंजीनियरों ने आंखों देखी बताई कि फर्मों के प्रतिनिधि गाड़ी से नीचे तक नहीं उतरते थे। जेजेएम विंग के कर्मचारी खुद गाड़ी तक आते और फाइल ओके होकर गाड़ी तक पहुंच जाती थी। गाड़ी जैसे ही पोर्च में आकर रुकती, इंजीनियरों में चर्चा शुरू हो जाती थी कि ‘कैश वैन’ आ गई है। एक सीनियर इंजीनियर ने बताया कि रात 8 बजे बाद जब गाड़ी रवाना होती, तो कुछ कर्मचारी उसे मुख्य द्वार तक छोड़ने भी आते थे।

घोटालेबाज इंजीनियरों की करतूत आई सामने

जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में अब यह साफ होता जा रहा है कि गड़बड़ी की जड़ें जलदाय विभाग के भीतर तक बहुत गहराई से फैली थीं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ई-मेल के जरिये फर्जीवाड़े की विस्तृत शिकायतें भेजी गई थीं, लेकिन उन पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति की गई। फर्जीवाड़े में शामिल फर्म के केरल स्थित दफ्तर की जांच करने पहुंची जलदाय अफसरों की टीम ने मौके पर दफ्तर होना बताया। जबकि एसीबी की जांच में वह होटल का कमरा निकला।

जलदाय अफसरों ने दी क्लीन चिट

एसीबी के डीआइजी डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि जलदाय विभाग के उच्चाधिकारियों को केरल के पते पर बनाए गए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों की शिकायत ई-मेल के माध्यम से प्राप्त हुई थी। नियमानुसार इन शिकायतों पर टेंडर प्रक्रिया रोककर जांच होनी चाहिए थी, लेकिन इसके उलट विभाग ने विशाल सक्सेना, महेश मित्तल, संजीव गुप्ता व मुकेश पाठक की एक टीम गठित कर भौतिक तस्दीक के लिए केरल भेजी।

जांच टीम ने केरल पहुंचकर एक होटल का कमरा किराए पर लिया और उसे दफ्तर जैसा स्वरूप देकर फोटो खींच ली। जयपुर लौटकर टीम ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित कंपनी का केरल में विधिवत कार्यालय होना दर्शाया और उसे क्लीन चिट दे दी।

एसआइटी को मिला होटल का कमरा

एसआइटी जब मामले की जांच करने केरल पहुंची तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिस जगह को कंपनी का दफ्तर बताया गया था, वहां वास्तव में एक होटल का कमरा संचालित था। इतना बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद भी विभाग के संबंधित अधिकारियों ने टेंडर रद्द नहीं किए, बल्कि फर्मों को करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया।
एसीबी को जांच के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि टेंडर प्रक्रिया में सुनियोजित मिलीभगत की गई थी।

सुबोध अग्रवाल का मोबाइल बंद, तलाश में जुटी टीमें

रिटायर्ड आइएएस सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए एसीबी की दो टीमें दिल्ली भेजी गई थीं। रणनीति के तहत एक टीम को घर के मुख्य द्वार और दूसरी टीम को पिछले हिस्से में तैनात किया गया। मंगलवार सुबह जब टीम ने घर पर दबिश दी, तो पता चला कि अग्रवाल रात को ही घर से निकल गए थे और नहीं लौटे।

उनका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है। एसीबी की टीम दिल्ली के विभिन्न ठिकानों पर उनकी तलाश में जुटी है। इसी के साथ जयपुर स्थित उनके आवास पर भी टीम भेजी गई, लेकिन वहां भी उनका कोई सुराग नहीं मिला।