
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, पत्रिका फाइल फोटो
Controversial single-lease case: जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण में प्रदेश के पूर्व मंत्री शांति धारीवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिले की अधीनस्थ अदालत ने जयपुर के एकल पट्टा प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को अग्रिम जांच की हरी झंडी दे दी है। प्रकरण में अब 27 फरवरी को सुनवाई होगी। इस मामले में तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के समय पेश एसीबी की क्लोजर रिपोर्ट के विरोध में प्रोटेस्ट पिटीशन लंबित है, जिस पर बाद में सुनवाई की जाएगी।
जयपुर महानगर-द्वितीय क्षेत्र के एसीबी मामलों के न्यायालय क्रम-4 ने शुक्रवार को इस मामले में एसीबी की ओर से अग्रिम जांच के लिए पेश प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की। इस मामले में गहलोत सरकार के समय ACB ने मामला बंद करने के लिए क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी थी, जिससे धारीवाल व अन्य को क्लीनचिट मिल गई थी। सत्ता बदलने के बाद एसीबी ने विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई और कोर्ट में अग्रिम जांच की अनुमति के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया। ACB की ओर से अधिवक्ता मदनमोहन नगायच ने कहा कि अग्रिम जांच रोकने का कोई आधार नहीं है, ऐसे में एसीबी को अग्रिम जांच की अनुमति दी जाए।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में नगरीय विकास विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव जीएस संधू, तत्कालीन उपसचिव निष्काम दिवाकर व जेडीए के जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी के खिलाफ अभियोजन वापसी को लेकर गहलोत सरकार के समय एसीबी ने 19 जनवरी, 2021 को आवेदन किया था। एसीबी कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। यह मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
बहुचर्चित एकल पट्टा मामला साल 2011 में जयपुर विकास प्राधिकरण से जुड़ा है। जिसमें गणपति कंस्ट्रक्शन कंपनी को एकल पट्टा देने का मामला सामने आया था, जिसमें राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ था। वर्ष 2013 में इस मामले में ACB में शिकायत दर्ज कराई गई थी। एसीबी ने इस मामले में साल 2014 में FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। हालांकि, गहलोत सरकार के कार्यकाल में एसीबी ने इस मामले में तीनों सरकारी अधिकारियों और पूर्व मंत्री शांति धारीवाल को क्लीन चिट देकर केस बंद कर दिया था।
प्रदेश में भजनलाल सरकार ने एकल पट्टा मामले की फिर जांच शुरू करने का फैसला लिया गया। उच्च स्तर पर मामले की विस्तृत जांच का निर्णय लिए जाने के बाद एसीबी ने ट्रायल कोर्ट से अग्रिम जांच की अनुमति मांगी थी। वहीं अब कोर्ट ने आदेश में कहा कि एसीबी को मामले में अग्रिम जांच करने की मंजूरी दे दी है।
गहलोत सरकार के समय 19 जनवरी 2021 को एसीबी ने अभियोजन वापसी का आवेदन किया था। जबकि भजनलाल सरकार ने करीब 5 साल बाद कोर्ट में उस आवेदन को वापस लेने का प्रार्थना पत्र दायर किया। प्रकरण में अब फिर से एसीबी की जांच शुरू होने पर माना जा रहा है कि पूर्व मंत्री शांति धारिवाल की मुश्किलें फिर से बढ़ने वाली है।
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Published on:
24 Jan 2026 06:51 am
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