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Union Budget 2026: राजस्थान के हेल्थ सेक्टर को संजीवनी, कैंसर–डायबिटीज के लाखों मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

बजट में फार्मा सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ रुपये और 'बायो-फार्मा शक्ति' योजना का ऐलान राजस्थान के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए हेल्थकेयर सेक्टर को लेकर लेकर कई अहम घोषणाएं की हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकता है कि शुगर (डायबिटीज) और कैंसर जैसी आम और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों की दवाएं आम लोगों को सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही फार्मा सेक्टर में 10 हजार करोड़ का निवेश होगा। इस बजट में दवा बनाने के लिए बायो फार्मा शक्ति का ऐलान किया गया।

कैंसर-यबिटीज के मरीजों को क्या-क्या राहत मिलेगी

राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में कैंसर और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों (डायबिटीज) के मामलों में "अलार्मिंग" बढ़ोतरी देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में कैंसर की औसत दर 134.57 प्रति लाख जनसंख्या है, जो राष्ट्रीय औसत (113) से काफी अधिक है। जयपुर, जोधपुर और बीकानेर जैसे शहरों में कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में दवाओं पर कस्टम ड्यूटी घटने से यहाँ के मरीजों का मासिक चिकित्सा खर्च 20% से 30% तक कम होने की उम्मीद है।

Union Budget 2026: 10 हजार करोड़ का निवेश: राजस्थान को क्या मिलेगा?

बजट में फार्मा सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ रुपये और 'बायो-फार्मा शक्ति' योजना का ऐलान राजस्थान के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

भिवाड़ी और नीमराणा हब: राजस्थान के भिवाड़ी और नीमराणा में पहले से ही फार्मा क्लस्टर सक्रिय हैं। नए निवेश से यहाँ की स्थानीय कंपनियों को कैंसर और डायबिटीज की जेनेरिक दवाएं बनाने के लिए नई तकनीक और फंड मिल सकेगा।

रोजगार के अवसर: दवा निर्माण क्षेत्र में निवेश से राजस्थान के युवाओं के लिए बायोटेक्नोलॉजी और रिसर्च के क्षेत्र में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे।

बायो-फार्मा शक्ति: इस योजना के तहत राजस्थान के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में नई लैब और रिसर्च सेंटर स्थापित होने की संभावना है।

General Budget Announcement: मिडिल क्लास और बुजुर्गों को सीधा फायदा

राजस्थान में एक बड़ा हिस्सा मध्यम वर्ग और बुजुर्ग आबादी का है जो पेंशन या सीमित आय पर निर्भर है।

डायबिटीज: राजस्थान में हर 10 में से 1 व्यक्ति डायबिटीज या प्री-डायबिटिक स्थिति से जूझ रहा है। इंसुलिन और अन्य दवाओं की कीमतों में कमी से इनके बजट पर बोझ कम होगा।

ऑटो-इम्यून बीमारियां: अर्थराइटिस और ल्यूपस जैसी बीमारियों के इंजेक्शन और दवाएं काफी महंगी आती हैं। कस्टम ड्यूटी हटने से ये दवाएं अब आम आदमी की पहुंच में होंगी।

मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा

सस्ता इलाज: केंद्र सरकार द्वारा दवाओं को सस्ता करने से राजस्थान के बड़े निजी अस्पतालों (जैसे जयपुर के मेदांता, फोर्टिस, और महात्मा गांधी अस्पताल) में इलाज की लागत कम होगी।

विदेशी मरीज: दवाओं के सस्ते होने से खाड़ी देशों और पड़ोसी राज्यों से आने वाले मरीजों के लिए राजस्थान एक सस्ता और बेहतर उपचार केंद्र बनकर उभरेगा।