
आज का सवाल: आपके शहर में सरकारी अस्पतालों में भीड़ और इंतेजार का समय ज्यादा है? इसके लिए क्या समाधान होना चाहिए।
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल एसएमएस से लेकर अन्य सरकारी अस्पतालों में बढ़ती भीड़ और लंबा इंतजार इलाज से पहले ही मरीजों की परीक्षा ले रहा है। स्टाफ की कमी, प्रबंधन की खामियां और योजनाओं का बढ़ता दबाव व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। आखिर समाधान क्या है? पेश है, शहरवासियों की राय।
शहर के सरकारी अस्पताल आमजन की बड़ी उम्मीद हैं, लेकिन बढ़ती भीड़ और लंबा इंतजार मरीजों और उनके परिजनों की पीड़ा बढ़ा रहा है। शहर के सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की संख्या बढ़ाना जरूरी है। ओपीडी प्रबंधन, ऑनलाइन पर्ची व्यवस्था और नियमित मॉनिटरिंग से ही सुधार संभव है। योजनाओं के साथ सख्त अमल भी अनिवार्य होना चाहिए। — सोहित निर्वाण, विद्यार्थी
सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था स्पष्ट दिखती है। मरीजों की लंबी कतारें, समय पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति और विशेषज्ञों की कमी से हालात बिगड़ते हैं। अधिकांश स्थानों पर जूनियर डॉक्टर ही उपलब्ध रहते हैं, जिससे जटिल मरीज एसएमएस जैसे बड़े अस्पतालों की ओर रुख करते हैं। व्यवस्था सुधार के लिए जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
— नरेश कुमार महावर, बीलवा (सांगानेर)
सरकारी अस्पतालों में भीड़ और इंतजार का एक कारण डॉक्टरों की समयबद्ध उपस्थिति का अभाव है। कई बार मरीजों को रजिस्ट्रेशन में ही इतना समय लग जाता है, कि डॉक्टर का समय समाप्त हो जाता है। ऐसे में जवाबदेही और निगरानी मजबूत हो तो कार्य संस्कृति सुधर सकती है।
— आशुतोष शर्मा, एडवोकेट, विद्याधर नगर
सरकारी योजना के तहत मुफ्त दवा, जांच और उपचार की सुविधा से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है। इससे भीड़ और प्रतीक्षा समय लंबा हो गया है। समाधान के लिए निजी अस्पतालों में भी इन योजनाओं को सख्ती से लागू कर सेवाओं का विस्तार किया जाए, ताकि भार संतुलित हो सके।
— सुरेंद्र कुमार बिंदल, लेखक, मॉडल टाउन
सरकारी अस्पतालों में भीड़ का बड़ा कारण रेफरल सिस्टम का सही तरीके से लागू न होना है। छोटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत किया जाए तो हर मरीज सीधे बड़े अस्पतालों में नहीं पहुंचेगा। प्राथमिक स्तर पर जांच और उपचार की सुविधा बढ़ेगी तो एसएमएस जैसे अस्पतालों पर दबाव कम होगा।
— शुभेन्द्रु घोष, मालवीय नगर
अस्पतालों में तकनीक का बेहतर उपयोग जरूरी है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, टोकन सिस्टम और जांच रिपोर्ट की डिजिटल व्यवस्था लागू हो तो मरीजों का समय बचेगा। साथ ही अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग काउंटर और हेल्पडेस्क होने चाहिए, ताकि बुजुर्ग और दूरदराज से आए लोगों को परेशानी न हो।
— राजेन्द्र कुंभज, सांगानेर
सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा और अनुशासन भी अहम मुद्दा है। कई बार अनावश्यक भीड़ और सिफारिशी दबाव से व्यवस्था प्रभावित होती है। यदि प्रवेश नियंत्रण, समयबद्ध विजिटिंग व्यवस्था और पारदर्शी नंबर प्रणाली लागू हो, तो मरीजों को बेहतर अनुभव मिल सकता है। प्रशासन को नियमित ऑडिट कर सुधार सुनिश्चित करना चाहिए।
— योगेश अग्रवाल, जगतपुरा
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अगले सप्ताह का सवाल
क्या शहर की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का लाभ आम नागरिक तक पहुंच रहा है? इसे किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
अपनी प्रतिक्रिया फोटो के साथ शुक्रवार तक 8094020235 नंबर पर भेज दें।
Updated on:
14 Feb 2026 08:46 pm
Published on:
14 Feb 2026 08:43 pm
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