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Throat Infection Kidney Risk: बार-बार गले में खराश को न करें नजरअंदाज! डॉक्टरों की चेतावनी, किडनी को हो सकता है नुकसान

Throat Infection Kidney Risk: अगर आपको बार-बार गले में इंफेक्शन या खराश होती है तो सावधान रहें। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ बैक्टीरियल इंफेक्शन किडनी में सूजन यानी ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस का कारण बन सकते हैं। जानिए इसके लक्षण और बचाव।

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भारत

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Dimple Yadav

Mar 11, 2026

Throat Infection Kidney Risk

Throat Infection Kidney Risk (photo- gemini ai)

Throat Infection Kidney Risk: मौसम बदलने, ज्यादा प्रदूषण या ठंडी-गर्म चीजें खाने की वजह से गले में खराश होना आम बात है। कई बार यह समस्या कुछ दिनों में दवा लेने या घरेलू इलाज से ठीक भी हो जाती है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मामलों में बार-बार होने वाला गले का इंफेक्शन आगे चलकर किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या भी पैदा कर सकता है।

डॉक्टर बताते हैं कि गले या त्वचा के बैक्टीरियल इंफेक्शन के बाद एक बीमारी हो सकती है जिसे इन्फेक्शन-रिलेटेड ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस कहा जाता है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) इंफेक्शन से लड़ते-लड़ते गलती से किडनी को भी नुकसान पहुंचाने लगती है। डॉ. शिवकुमार डी, के मुताबिक, यह किडनी में सूजन की एक स्थिति है जो तब होती है जब शरीर का इम्यून सिस्टम किसी संक्रमण के खिलाफ प्रतिक्रिया देता है और उसका असर किडनी पर पड़ जाता है। गले या त्वचा में होने वाले बैक्टीरिया जैसे स्ट्रेप्टोकोकस या स्टेफाइलोकोकस इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं।

कैसे गले का इंफेक्शन किडनी को प्रभावित करता है?

डॉक्टरों के अनुसार, जब गले में बैक्टीरिया जैसे स्ट्रेप्टोकोकस या स्टेफाइलोकोकस का संक्रमण होता है, तो शरीर उससे लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है। ये एंटीबॉडी और बैक्टीरिया मिलकर छोटे-छोटे कण बनाते हैं जिन्हें इम्यून कॉम्प्लेक्स कहा जाता है। ये कण खून के जरिए शरीर में घूमते रहते हैं और कई बार किडनी के फिल्टर में जाकर जमा हो जाते हैं। किडनी के इन फिल्टर को ग्लोमेरुली कहा जाता है। जब यहां सूजन हो जाती है तो किडनी ठीक से खून साफ नहीं कर पाती और शरीर में पानी व गंदे तत्व जमा होने लगते हैं।

भारत में क्यों ज्यादा चिंता की बात?

डॉक्टरों का कहना है कि भारत जैसे देशों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसकी वजह यह है कि यहां गले के इंफेक्शन और त्वचा के संक्रमण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। कई लोग समय पर इलाज नहीं करवाते या एंटीबायोटिक दवाइयों का पूरा कोर्स नहीं लेते। इसके अलावा साफ-सफाई की कमी और इलाज में देरी भी इस समस्या का खतरा बढ़ा सकती है। एक और खास बात यह है कि किडनी की यह समस्या अक्सर गले के इंफेक्शन के 1 से 3 हफ्ते बाद दिखाई देती है, जब तक गले की तकलीफ पूरी तरह खत्म हो चुकी होती है। इसलिए लोग दोनों समस्याओं को जोड़कर नहीं देख पाते।

किन लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है?

अगर हाल ही में गले का इंफेक्शन हुआ हो और उसके कुछ दिनों बाद ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। पेशाब का रंग गहरा या कोला जैसा होना, आंखों, चेहरे या पैरों में सूजन, पेशाब कम आना, ज्यादा थकान या कमजोरी, ब्लड प्रेशर बढ़ना, ये लक्षण इस बात का संकेत हो सकते हैं कि किडनी में सूजन आ गई है और वह सही तरीके से काम नहीं कर रही।

इलाज और बचाव

अच्छी बात यह है कि अगर इस समस्या को समय पर पहचान लिया जाए और सही इलाज मिल जाए, तो ज्यादातर मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। इलाज के दौरान डॉक्टर ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने, शरीर में जमा अतिरिक्त पानी कम करने और किडनी की कार्यक्षमता पर नजर रखने की सलाह देते हैं। कई बार नमक कम खाने जैसी डाइट में बदलाव भी मददगार साबित होते हैं। इसलिए गले में बार-बार होने वाली खराश या इंफेक्शन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर इलाज और सावधानी बरतकर किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।