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Black Rain क्या है? डॉक्टरों ने बताया काली बारिश से कैसे बढ़ सकता है सांस और दिल की बीमारियों का खतरा

Black Rain Health Risks: ईरान में हुई ब्लैक रेन ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदूषण और जहरीले कणों से भरी यह बारिश सांस, दिल और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। जानिए क्या है ब्लैक रेन और इससे कैसे बचें।

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भारत

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Dimple Yadav

Mar 11, 2026

Black Rain Health Risks

Black Rain Health Risks (Photo- gemini ai)

Black Rain Health Risks: हाल ही में ईरान के कुछ हिस्सों में एक बेहद दुर्लभ और चिंताजनक घटना सामने आई, जिसे ब्लैक रेन यानी काली बारिश कहा जा रहा है। इस अजीब तरह की बारिश ने लोगों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि यह बारिश प्रदूषण, धुएं और तेल के अवशेषों की वजह से काली दिखाई दी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल से जुड़ी कुछ फैक्ट्रियों में आग और धमाकों के बाद हवा में भारी मात्रा में धुआं, कालिख और जहरीले केमिकल फैल गए। जब ये प्रदूषित कण हवा में मौजूद नमी के साथ मिलते हैं, तो बारिश के साथ जमीन पर गिरते हैं। इसी वजह से बारिश का पानी काला या तेल जैसा दिखने लगता है।

क्या होती है ब्लैक रेन?

ब्लैक रेन तब होती है जब हवा में मौजूद धुआं, कालिख, राख और औद्योगिक प्रदूषक पानी की बूंदों के साथ मिल जाते हैं। जब किसी बड़े हादसे, आग या औद्योगिक दुर्घटना के बाद हवा में बहुत ज्यादा प्रदूषण फैल जाता है, तो बारिश बनने के दौरान ये जहरीले कण पानी में मिल जाते हैं। इसके बाद जब बारिश होती है, तो यह काले या गंदे रंग की दिखाई देती है। इतिहास में भी कई बार युद्ध या बड़े पर्यावरणीय हादसों के दौरान ब्लैक रेन की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

सेहत के लिए क्यों खतरनाक है यह बारिश?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्रदूषित बारिश में बहुत छोटे-छोटे जहरीले कण, भारी धातुएं और केमिकल मौजूद हो सकते हैं। डॉ. रणदीप गुलेरिया के मुताबिक, धुएं और जहरीले प्रदूषकों से भरे बादल अगर किसी इलाके में पहुंचते हैं, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।डॉ. गुलेरिया बताते हैं कि हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बहुत छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं और यहां तक कि खून में भी मिल सकते हैं। इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

इससे कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं?

ऐसे प्रदूषित कणों के संपर्क में आने से कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं, जैसे:

  • ब्रोंकाइटिस का खतरा बढ़ना
  • आंखों, गले और त्वचा में जलन
  • दिल के दौरे और हृदय से जुड़ी समस्याओं का खतरा
  • लंबे समय तक संपर्क रहने पर फेफड़ों की गंभीर बीमारी या कैंसर का जोखिम

उत्तर भारत में भी बढ़ सकती है चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े हादसों के बाद उठने वाले धुएं और प्रदूषक हवा के साथ दूर-दूर तक फैल सकते हैं। अगर ऐसे प्रदूषित बादल उत्तर भारत की ओर आते हैं, तो पहले से खराब एयर क्वालिटी और भी खराब हो सकती है।

खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

डॉ. गुलेरिया के अनुसार ऐसे समय में कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं:

  • जब हवा की गुणवत्ता खराब हो, तो घर के अंदर ही रहने की कोशिश करें
  • खिड़की और दरवाजे बंद रखें
  • घर में HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें
  • बाहर जाना जरूरी हो तो N95 या KN95 मास्क पहनें
  • शरीर को हाइड्रेट रखें और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन लें

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिल या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। अगर लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या आंखों में तेज जलन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। कुल मिलाकर, ब्लैक रेन भले ही दुर्लभ घटना हो, लेकिन यह हमें प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े खतरों के प्रति सतर्क रहने की याद दिलाती है।