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राजस्थान के रिसर्च स्कॉलर ने IIT कानपुर में की आत्महत्या, पीएचडी अपार्टमेंट से लगाई छलांग, एक साल में 5वीं मौत

कानपुर स्थित आईआईटी में एक और आत्महत्या से हड़कंप मच गया। चूरू निवासी 25 वर्षीय रिसर्च स्कॉलर रामस्वरूप ईशराम ने पीएचडी अपार्टमेंट की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। 23 दिन में यह दूसरी और 11-12 महीने में 5वीं मौत है।

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चूरू

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Arvind Rao

Jan 21, 2026

Rajasthan Churu Research Scholar Dies

Churu Research Scholar Ramswaroop Ishram Dies (Patrika File Photo)

Churu News: कानपुर स्थित आईआईटी में एक बार फिर आत्महत्या की घटना ने संस्थान को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार को अर्थ साइंस विभाग के रिसर्च स्कॉलर रामस्वरूप ईशराम ने पीएचडी अपार्टमेंट की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। यह घटना बीते 23 दिनों में संस्थान में हुई दूसरी आत्महत्या है। जबकि पिछले 11-12 महीनों में यह पांचवीं मौत बताई जा रही है।

राजस्थान के चूरू जिले के गिरवरसर, विधासर निवासी 25 वर्षीय रामस्वरूप ईशराम आईआईटी कानपुर में अर्थ साइंस विषय से पीएचडी कर रहे थे। वह पत्नी मंजू और दो साल की बेटी के साथ कैंपस स्थित एसबीआरए बिल्डिंग के फ्लैट नंबर एए-21 में रहते थे। यह अपार्टमेंट उन शोधार्थियों को आवंटित किया जाता है, जिन्हें परिवार के साथ रहने की अनुमति होती है।

बालकनी से लगाई छलांग

मंगलवार दोपहर रामस्वरूप अचानक फ्लैट से बाहर निकले और गलियारे में बनी बालकनी से नीचे छलांग लगा दी। गिरते समय वह एक बिजली के पोल से टकराए और सड़क पर जा गिरे। घटना की जानकारी मिलते ही सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिजनों और संस्थान से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रामस्वरूप लंबे समय से एंजाइटी की समस्या से जूझ रहे थे। उनकी काउंसिलिंग भी चल रही थी। इसके बावजूद यह कदम उठाए जाने से आईआईटी के काउंसिलिंग सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब तक पांच शोधार्थियों की मौत

आईआईटी कानपुर में आत्महत्या की लगातार हो रही घटनाओं ने संस्थान की छात्र सहायता नीतियों की प्रभावशीलता पर चिंता बढ़ा दी है। बीते एक साल में पांच होनहार छात्रों और शोधार्थियों की मौत हो चुकी है।

हालांकि, संस्थान का दावा है कि छात्रों को तनाव से बाहर निकालने के लिए काउंसिलिंग सेल की सुविधा उपलब्ध है और अकादमिक दबाव कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन घटनाओं का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा।

जवाब देगा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

गौरतलब है कि आत्महत्या के मामलों को लेकर आईआईटी कानपुर को 22 जनवरी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को जवाब देना है। दिसंबर में हुई एक आत्महत्या के मामले को पहले ही वर्ष 2024 में दायर रिट में शामिल किया जा चुका है। अब रामस्वरूप ईशराम की मौत को भी उसी रिट में मर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।