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सोने-चांदी के जारी हैं तीखे तेवर, आमजन की पकड़ से दूर होते जेवर, चांदी-सोने के निरंतर बढ़ते भावों से सकते में आया बाजार

सोना-चांदी के कारोबार से जुड़े व्यापारियों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ व्यापारियों का मानना है कि बढ़ते भावों से कीमती धातुओं की चमक बढ़ी है, जबकि अन्य का कहना है कि निरंतर बढ़ोतरी से इनकी चमक फीकी पड़ने लगी है।

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चूरू. किसी समय चांदी की प्रमुख मण्डी रहे चूरू में एक बार फिर सोना-चांदी चर्चा का केंद्र बन गया है। सोने और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों ने जहां जिले के सर्राफा बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है, वहीं जेवर खरीदने वाले आमजन के तेवर अब नरम पड़ते नजर आ रहे हैं। सोना-चांदी के कारोबार से जुड़े व्यापारियों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ व्यापारियों का मानना है कि बढ़ते भावों से कीमती धातुओं की चमक बढ़ी है, जबकि अन्य का कहना है कि निरंतर बढ़ोतरी से इनकी चमक फीकी पड़ने लगी है।

मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा मार
सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। कई महिलाओं ने चिंता जताते हुए बताया कि छोटे-मोटे काम, नौकरी और रोजमर्रा की मेहनत से कमाने वाले लोगों की पहुंच से अब चांदी भी दूर होती जा रही है, वहीं सोने के आभूषण खरीदना तो लगभग नामुमकिन हो गया है। वरिष्ठ महिलाओं का कहना है कि पहले चांदी का उपयोग आपसी लेन-देन और घरेलू जरूरतों में होता था, लेकिन अब घर में इसकी पूर्ति करने से पहले चार बार सोचना पड़ता है।

हल्की पायल भी 12 हजार की
चांदी-सोने के कारोबार से जुड़े खुदरा व्यापारी बताते हैं कि सावों के सीजन में बढ़ती कीमतों का गहरा असर देखने को मिल रहा है। एक हल्की 30 ग्राम की चांदी की पायल की कीमत करीब 12 हजार रुपए तक पहुंच गई है। वहीं, एक हजार रुपए से कम में बिछिया मिलना भी मुश्किल हो गया है। शादी-ब्याह के लिए आवश्यक जेवरों का वजन भी अब कम कराया जा रहा है। सोने की एक साधारण अंगूठी 50 हजार रुपए तक की पड़ रही है। ऐसे में लोग नए जेवर बनवाने के बजाय घर में रखे पुराने जेवरों में कटौती कर काम चला रहे हैं।

क्या कहते हैं व्यापारी
चूरू के सर्राफा बाजार (Churu Bullion Market) से जुड़े कुछ व्यापारियों का कहना है कि भाव भले ही बढ़े हों, लेकिन सोने-चांदी का महत्व और आकर्षण भी बढ़ा है। युवा व्यापारियों के अनुसार भावों में स्थिरता नहीं होने के कारण बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं खुदरा व्यापारियों का कहना है कि भाव ऊंचे जरूर हैं, लेकिन लेवाली-देवाली लगभग ठप पड़ी है। एक बड़े सर्राफा व्यापारी का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता बनी रहेगी, तब तक पीली और श्वेत धातुओं के भावों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। भावों में जिस तरह का अप्रत्याशित उछाल आ रहा है, उससे खरीद और बिक्री दोनों प्रभावित हो रही हैं।

कभी चांदी की बड़ी मंडी था चूरू
कभी चांदी की बड़ी मंडियों में शुमार रहा चूरू (Churu Silver Hub) न केवल चांदी के बर्तन और आभूषण, बल्कि कोरी चांदी के कारोबार का भी प्रमुख केंद्र हुआ करता था। समय के साथ सर्राफा बाजार का स्वरूप बदल गया। जहां पहले चांदी के बर्तन बनाने के कारखाने हुआ करते थे, वहां अब आभूषणों के शोरूम नजर आते हैं। सर्राफा बाजार की पारंपरिक गद्दियां अब सजे-धजे काउंटरों में तब्दील हो चुकी हैं। बदले हुए इस स्वरूप के बीच सोने-चांदी के भावों में लगातार हो रहा उछाल आमजन के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।