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शहर की गलियों और मुख्य सडक़ों पर बरते आवारा कुत्तों के झुंड और उनके कारण होने वाले हादसों से अब शहरवासियों को जल्द निजात मिलने वाली है। नगर पालिका छतरपुर ने आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पन्ना रोड स्थित कचरा प्रसंस्करण केंद्र परिसर में 25 लाख रुपए की अनुमानित लागत से जिले का पहला सर्वसुविधायुक्त एनिमल बर्थ कंट्रोल' सेंटर बनाने जा रहा है। इस सेंटर के लिए स्थान का निर्धारण कर लिया गया है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
पिछले कुछ समय से छतरपुर के लगभग हर वार्ड में आवारा कुत्तों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। रात के समय बाइक सवारों के पीछे दौडऩा, राहगीरों को काटना और आपस में लेकर सडक़ हादसों का कारण बनना आम बात हो गई है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में इन कुत्तों को लेकर भारी खौफ देखा जा रहा था। इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ माधुरी शर्मा ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस सेंटर के माध्यम से आवारा कुत्तों के प्रजनन पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा।
प्रस्तावित एबीसी सेंटर में कुत्तों के प्रजनन पर नियंत्रण पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली सीएनवीआर प्रक्रिया (पकडऩा, नसबंदी करना, टीकाकरण और वापस छोडऩा) अपनाई जाएगी। सेंटर की विशेषताएं निम्नलिखित होंगी।
आधुनिक ऑपरेशन थिएटर- नसबंदी के लिए अनुभवी पशु चिकित्सकों की टीम तैनात होगी, जो गैस एनेस्थीसिया जैसी आधुनिक मशीनों का उपयोग कर सुरक्षित सर्जरी सुनिश्चित करेगी।
टीकाकरण अभियान- नसबंदी के साथ-साथ कुत्तों को रेबीज रोधी टीके लगाए जाएंगे, जिससे शहर में रेबीज फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।
पोस्ट-ऑपरेटिव केयर- सर्जरी के बाद कुत्तों को तुरंत सडक़ पर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें विशेष डॉग हाउस और शेल्टर में रखकर पूर्ण स्वस्थ होने तक देखभाल प्रदान की जाएगी।
पहचान और रिकॉड- नसबंदी के बाद कुत्तों के कान पर एक विशेष निशान लगाया जाएगा, जिससे उनकी पहचान करना आसान होगा कि किस क्षेत्र के कुत्तों का उपचार हो चुका है।
नगर पालिका की इस योजना में केवल नसबंदी ही नहीं, बल्कि बीमार और सडक़ हादसों में घायल होने वाले आवारा पशुओं के लिए प्राथमिक उपचार की सुविधा भी शामिल की गई है। पन्ना रोड पर बनने वाला यह केंद्र एक तरह से आवारा पशुओं के लिए रेस्क्यू सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा। यहां अनुभवी पशु चिकित्सक उपलब्ध रहेंगे जो आवारा पशुओं की सर्जरी और आवश्यक चिकित्सा देखभाल करेंगे।
सीएमओ माधुरी शर्मा के अनुसार शहर में आवारा कुत्तों की संख्या काफी बढ़ चुकी है जिससे सडक़ हादसों, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। इन कुत्तों की नसबंदी करने के लिए यह सेंटर अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। इस योजना के लागू होने से न केवल उनकी संख्या नियंत्रित होगी, बल्कि शहर में संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना भी कम होगी। वर्तमान में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक के कारण लोग डर के माहौल में रहते हैं, खासकर वरिष्ठ नागरिक और छोटे बच्चे, जिन्हें इस सेंटर के बनने के बाद बढ़ी राहत मिलेगी।
Published on:
06 Mar 2026 10:30 am
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