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Bundi School Roof Collapse: बूंदी में स्कूल के बरामदे की छत अचानक ढही, तीस बच्चे बाल-बाल बच गए

बूंदी के गेण्डोली क्षेत्र में राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल के बरामदे की छत मंगलवार सुबह करीब पौने ग्यारह बजे अचानक ढह गई। गनीमत रही कि हादसे के समय स्कूल में मौजूद सभी बच्चे मैदान में बैठे हुए थे, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।

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स्कूल का गिरा बरामदा: फोटो पत्रिका

बूंदी। गेण्डोली क्षेत्र के फोलाई पंचायत के भैंसखेड़ा गांव में राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल के बरामदे की छत मंगलवार सुबह करीब पौने ग्यारह बजे अचानक ढह गई। गनीमत रही कि हादसे के समय स्कूल में मौजूद सभी बच्चे मैदान में बैठे हुए थे, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। इसी बरामदे के भीतर प्रतिदिन दोपहर में बच्चों को पोषाहार दिया जाता है। हादसे के समय स्कूल परिसर में तीस बच्चे मौजूद थे।

घटना के प्रत्यक्षदर्शी शिक्षक विकास डाबी ने बताया कि वे सुबह करीब साढ़े दस बजे स्कूल पहुंचे थे। उस समय सभी छात्र-छात्राएं प्रार्थना के बाद सर्दी के कारण स्कूल के मैदान में धूप में बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। रसोई में पोषाहार बनाने वाली महिला दूध गर्म कर भोजन की तैयारी कर रही थी। वे कार्यालय से रजिस्टर लेकर बाहर निकले ही थे कि कुछ देर बाद स्कूल के बरामदे की छत अचानक भरभराकर धराशायी हो गई। संयोग से उस समय बरामदे या उसके आसपास बच्चे नहीं थे। तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर दौड़कर पहुंचे।

सूचना मिलने पर प्रशासक रामस्वरूप खींचा, पंचायत शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र कुमार मीणा, ग्राम विकास अधिकारी प्रमोद कुमार गुर्जर एवं गेण्डोली थानाधिकारी तेजपाल सैनी मय जाप्ता मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बच्चों की कुशलक्षेम पूछी और स्कूल प्रशासन से घटना की पूरी जानकारी लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।

एक शिक्षक ही मौजूद था

स्कूल में कुल 38 बच्चों के लिए पांच शिक्षक नियुक्त हैं, लेकिन मंगलवार को हादसे के समय स्कूल परिसर में केवल एक शिक्षक विकास डाबी ही मौजूद थे। प्रधानाध्यापक कौशल किशोर मीणा एवं शिक्षक पारस मीणा की दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के तहत गेण्डोली में ड्यूटी लगी हुई थी। वहीं प्रबोधक रामलाल गोचर को बीएलओ का कार्यभार सौंपा गया था और उनकी एसआईआर कार्य में ड्यूटी थी। एक शिक्षिका रानी बैरवा हादसे के आधे घंटे बाद स्कूल पहुंचीं। सूचना मिलने पर करीब एक घंटे बाद प्रधानाध्यापक कौशल किशोर मीणा विद्यालय पहुंचे।

दो दशक पहले बना था भवन

ग्रामीणों के अनुसार स्कूल भवन लगभग दो दशक पूर्व निर्मित किया गया था और लंबे समय से खस्ताहाल स्थिति में था। वर्तमान में यहां तीन कमरे और एक रसोई है। एक कमरा प्रधानाध्यापक और स्टाफ कक्ष है, जबकि एक कमरे में पहली से पांचवीं और दूसरे कमरे में छठी से आठवीं तक कक्षाएं चलती हैं। प्रधानाध्यापक कौशल किशोर मीणा ने बताया कि भवन की मरम्मत एवं जमींदोज किए जाने को लेकर पूर्व में ही प्रशासन को प्रस्ताव भेजे जा चुके थे।

मरम्मत से पहले ढहा

गत सितंबर माह में स्कूल के एक कमरे को उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जमींदोज कर दिया गया था। शेष भवन को क्षतिग्रस्त मानते हुए प्रशासन ने एसडीआरएफ योजना के अंतर्गत मरम्मत के लिए दो लाख रुपए की राशि स्वीकृत की थी। संबंधित ठेकेदार को बुधवार काम शुरू करना था, लेकिन कार्य शुरू होने से पहले ही बरामदा ढह गया।

अब निजी मकान में चलेगा स्कूल

स्कूल भवन का बरामदा ढहने की सूचना पर रायथल तहसीलदार नरोत्तम मीणा एवं शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे स्कूल भवन को खतरनाक एवं क्षतिग्रस्त बताया तथा बच्चों एवं ग्रामीणों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाकर स्कूल को अन्य स्थान पर संचालित करने के निर्देश दिए। बाद में एसडीएमसी अध्यक्ष जुगराज गुर्जर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर निर्णय लिया गया कि स्कूल का संचालन फिलहाल गांव में ही एक निजी मकान में किया जाएगा।