
बूंदी. पशु बीमा करते विभाग के कर्मचारी।
बूंदी. प्रदेश के सभी जिलों को नए वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के दिए लक्ष्य में दूरस्थ और नई ग्राम पंचायतों में नेटवर्क नहीं मिलने की समस्या से रुकावट आ गई है। नतीजा यह कि प्रदेश को मिले 21 लाख के लक्ष्य के मुताबिक अब तक सिर्फ एक माह में 4 लाख 79 हजार 33 के करीब पशुओं का बीमा हो सका है। इससे योजना की जमीनी हकीकत को उजागर करती है।
जबकि अधिकारियों के अनुसार 29 दिसंबर के बाद से पोर्टल अटक-अटक के चल रहा है, जिससे भी समस्या खड़ी हो रही है। हालात यह हैं कि अधिकारी-कर्मचारी दिनभर गांवों में डटे रहते हैं, लेकिन डेटा अपलोड न होने से बीमा कार्य अधूरा रह जाता है। योजना 1 दिसंबर 2025 से शुरू हुई है। इसको पूरा 31 मार्च 2026 तक करना है। भरतपुर जिला पहले पायदान पर बना हुआ, 25 हजार 750 लक्ष्य के मुकाबले 10 हजार 860 पंजीकरण होने के साथ पहले पायदान पर है। जबकि खैरथल-तिजारा 5 हजार 912 पंजीकरण के साथ दूसरे नंबर पर है। वहीं बूंदी जिला 11 हजार 739 पंजीकरण के साथ आठवें नंबर पर काबिज है।
जिले की स्थिति
अधिकारियों के अनुसार बूंदी जिले में 28 हजार पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य मिला है, अब तक जिला 11 हजार 739 पशुओं का बीमा का कार्य पूरा कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि जिस तरीके से जिले की टीम अच्छा कार्य कर रही, जल्द लक्ष्य को पूर्ण किया जाएगा।
37 चिकित्सकों की टीम जुटी
जिले में मंगला पशु बीमा योजना के लिए 37 चिकित्सकों की टीम जुटी हुई है। बावजूद इनके नेटवर्क की समस्या ने उनकी मेहनत को अधूरा कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार कई बार गांवों में दिनभर शिविर लगाने के बाद भी डेटा अपलोड नहीं हो पाता। इससे पशुपालकों में निराशा बढ़ रही है। सबसे बड़ी समस्या नवगठित पंचायत को राज मास्टर पर अपडेट किया जा रहा है। इसलिए तकनीकी समस्या के कारण मोबाइल एप सही प्रकार से कार्य नहीं कर रहा है। जहां किसी कंपनी का मोबाइल नेटवर्क नहीं है। वहां पर ऑफलाइन काम करना संभव नहीं है।
ऑनलाइन करना पड़ता है पंजीकरण
योजना के तहत पशुपालकों को जनाधार कार्ड से दो यूनिट का बीमा करवाने की सुविधा दी गई है। इसके लिए मोबाइल एप या वेबसाइट पर ई-मित्र की मदद से ऑनलाइन पंजीकरण करना पड़ता है। इसके बाद पशु चिकित्सक और बीमा सर्वे एजेंट संयुक्त रूप से ग्राम स्तर पर शिविर लगाकर पंजीकृत पशुओं का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी करते हैं। तभी बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग पॉलिसी जारी करता है, लेकिन नेटवर्क की समस्या इस पूरी प्रक्रिया को अधूरा छोड़ देती है।
पशुपालक लाभ से हो सकते है वंचित
बीमा कार्य पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जा रहा है। ऐसे में देरी करने वाले पशुपालक लाभ से वंचित हो सकते हैं। अधिकारियों की माने तो पशुपालक स्वयं भी मंगला पशु बीमा योजना की नई एप डाउनलोड कर पंजीकरण कर सकता है।
जयपुर 22वें नम्बर पर काबिज
राजधानी 22 वें पायदान पर है। जयपुर जिले के 90 हजार 700 लक्ष्य के मुकाबले अब तक 25 हजार 219 पंजीकरण हो सका है।। जबकि तीसरे नंबर पर ब्यावर जिले में 8126 बीमा, चौथे नंबर पर बारां 8817, पांचवें नंबर पर दौसा 13,586, कौटपुतली बहरोड छठे नंबर पर 8457, बांसवाड़ा सातवें नंबर पर 14308, सवाईमाधोपुर नवें पायदान पर 8818, नागौर 16 हजार 597 पशुओं के बीमा के साथ दसवें पायदान पर काबिज है। कोटा जिला 34 वें नंबर पर लक्ष्य 21 हजार 500 में से 3 हजार 221 हो सका है। जबकि झुंझंनु, सिरोही, जैसलमेर, बाड़मेर व बीकानेर अंतिम पांचवें पायदान पर है। यह आकंडे 9 जनवरी की रिपोर्ट के अनुसार है।
पशुपालन विभाग द्वारा संचालित मंगला पशु बीमा योजना राज्य सरकार की बजट घोषणा के अंतर्गत एक महत्वाकांक्षी योजना है। एक दिसंबर 2025 से प्रारंभ हुई इस योजना में बूंदी जिले में 11 हजार 7398 पशुओं का बीमा हो चुका है। फिलहाल अभी नवगठित पंचायत को राज मास्टर पर अपडेट किया जा रहा है। ऐसे में तकनीकी समस्या के कारण मोबाइल एप सही प्रकार से कार्य नहीं कर रहा है, जिससे डेटा शो नहीं हो पा रहा है।
डॉ. संजय कुमार मीणा, उपनिदेशक, पशुधन विकास, पशुपालन विभाग बूंदी
Published on:
13 Jan 2026 06:11 pm

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