
land guidelines प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)
MP News: मध्यप्रदेश में जमीन की कीमतों को तय करने वाली कलेक्टर गाइडलाइन को इस बार पूरी तरह वैज्ञानिक और बाजार मूल्य के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पंजीयन विभाग पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के साथ सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करते हुए नई गाइडलाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बीते एक वर्ष में जिन क्षेत्रों में नया विकास हुआ है, वह गाइडलाइन से बाहर न रह जाए।
नई गाइडलाइन 1 अप्रेल से लागू होगी और इसका सीधा असर जमीन की दरों पर दिखाई देगा। पंजीयन विभाग द्वारा यह प्रयोग मप्र इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के सहयोग से किया जा रहा है। इसके तहत जिलों की एक साल पुरानी और वर्तमान सैटेलाइट इमेज निकलवाई है। इनको पंजीयन मुख्यालय से संबंधित जिलों को भेजा जाएगा, ताकि जमीन में आए बदलाव को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जा सके। सैटेलाइट इमेज से यह देखा जा रहा है कि पिछले वर्ष जो जमीन खाली थी, वहां अब क्या स्थिति है। कहीं उस पर प्लॉटिंग हो चुकी है, तो कहीं कॉलोनी विकसित हो चुकी हैं।
पंजीयन विभाग ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की भी मदद ली है। वहां से डायवर्सन का डेटा लिया गया है। इसमें यह पता चलेगा कि कितनी कृषि भूमि का आवासीय में डायवर्सन हो चुका है। अब वहां विकास कार्य शुरू हो जाएगा। इसलिए वहां भी कृषि भूमि की बजाय अब प्लॉट के रेट लागू किए जाएंगे। पंजीयन विभाग ने कृषि विभाग से भी डेटा लिया है।
एसडीएम की अध्यक्षता वाली उप जिला मूल्यांकन समिति ऐसे क्षेत्रों का सर्वे करती है जहां गाइडलाइन से अधिक रेट पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। इसका डेटा एआइ की मदद से निकाल रहे हैं। कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति उसे अंतिम रूप देकर केन्द्रीय बोर्ड को भेजती है। यहां से मुहर लगने के बाद प्रस्ताव 1 अप्रेल से लागू किया जाता है।
-जमीन की दरें वास्तविक बाजार मूल्य के ज्यादा करीब तय होंगी।
-पिछले एक साल में हुए नए डेवलपमेंट को सीधे गाइडलाइन में शामिल किया जा सकेगा।
-कृषि भूमि से आवासीय या व्यावसायिक बनी जमीन का सही मूल्यांकन होगा।
-अंडरवैल्यू रजिस्ट्रियों पर प्रभावी रोक लगेगी।
-राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी और प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी
-जिलों में एक समान और वैज्ञानिक पद्धति से दरें तय होंगी।
नई गाइडलाइन साइंटिफिक तरीके से और बाजार मूल्य के अनुरूप बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस बार सैटेलाइट इमेजरी का भी उपयोग किया है। इससे खाली पड़ी जमीन पर हुए डेवलपमेंट की पहचान हो सकेगी।- अमित तोमर, महानिरीक्षक पंजीयन मप्र
Published on:
08 Feb 2026 12:52 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
