
blood clot प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)
MP News: मेडिकल साइंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने क्रांति ला दी है। अब एआइ की मदद से दिमाग के भीतर होने वाली जानलेवा ब्लीडिंग (इंट्राक्रॉनियल हैमरेज) की पहचान पहले से कहीं अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी। हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने ऐसा एआइ मॉडल विकसित किया है, जो ब्रेन हेमरेज के विभिन्न प्रकारों की पहचान लगभग 98 प्रतिशत सटीकता से कर सकता है। इसमें गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के मरीजों के क्लीनिकल डेटा का उपयोग किया गया है। इस तकनीक को जीएमसी और आइआइएसईआर के वैज्ञानिकों ने मिलकर विकसित किया है।
एपीड्यूरल (इडीएच) और सबड्यूरल (एसडीएच) को सीटी स्कैन मे अलग-अलग पहचानना कई बार कठिन होता है, जिससे इलाज में देरी हो सकती है। इस समस्या के समाधान के लिए शोधकर्ताओं ने दो एआइ तकनीकों को मिलाकर एक ''एन्से्बल फ्रेमवर्क'' तैयार किया है। इसमें अटेंशन-गेटेड 2डी सीएनएन और डीडब्ल्यूटी तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे ब्लीडिंग की पहचान और सटीक हो जाती है। इस मॉडल का परीक्षण अंतरराष्ट्रीय डेटासेट के साथ जीएमसी के डेटा पर किया गया, जिसमें यह तकनीक ब्रेन हेमरेज के पांचों प्रमुख प्रकारों की पहचान करने में सफल रही।
यह टूल खासतौर पर ग्रामीण और संसाधन-कम इलाकों में उपयोगी साबित हो सकता है, जहां न्यूरोसर्जन या सीनियर रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होते। सीटी स्कैन के तुरंत बाद एआइ ब्लीङ्क्षडग की मौजूदगी, उसका प्रकार और गंभीरता बताकर डॉक्टरों को सही समय पर निर्णय लेने में मदद करता है।
50 वर्षीय रामलाल के सिर में चोट लगने पर जिला अस्पताल में सीटी स्कैन हुआ। वहां न्यूरोसर्जन न होने पर भी एआइ टूल ने तुरंत ब्लीडिंग की पहचान कर ली। इससे डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए बड़े अस्पताल रेफर करने को कहा, जिससे जान बच गई।
हादसे का शिकार हुए 45 वर्षीय रवि को बेहोशी में अस्पताल लाया गया। एआइ सिस्टम ने कुछ ही सेकंड में ब्लीडिंग का सटीक प्रकार बता दिया। इससे डॉक्टरों ने 'गोल्डन ऑवर' में ही सर्जरी शुरू कर दी और गंभीर घायल रवि की जान बच गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड में यह एआइ सिस्टम डॉक्टरों के लिए एक डिजिटल सहायक की तरह काम करेगा। इससे रेडियोलॉजिस्ट का समय बचेगा, इलाज में देरी कम होगी और मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ेगी। जीएमसी की डीन, डॉ. कविता सिंह ने आइआइएसईआर के साथ एमओयू किया और सभी विभागों को शामिल करते हुए एक बहुविभागीय समिति गठित की।
रेडियोडायग्नोसिस विभाग की प्रमुख डॉ. लवली कौशल सलाहकार, लीड और कन्वीनर डॉ. स्वाति गोयल हैं। इसमें आइआइएसईआर के डेटा साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. तनय बसु सहित शोधकर्ताओं का योगदान रहा। यह रिसर्च एल्सेवियर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। यह बड़ी सफलता है।
Published on:
08 Feb 2026 11:43 am
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