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एमपी को बड़ी सौगात, अब बिल्लियों के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट शुरु करेगी सरकार

Special project for wild cats-लेसर नोन स्पीशीज पर चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन में चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन शुभरंजन सेन का बड़ा ऐलान

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MP government to start a special project for wild cats

जंगली बिल्लियों के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट- demo pic

Special project for wild cats- वन्यजीवों के प्रबंधन में मध्यप्रदेश हमेशा उत्कृष्ट रहा है। यहां बीते सालों में अनेक कई कीर्तिमान स्थापित किए गए हैं। प्रदेश अनेक टाइगर प्रोजेक्ट के लिए प्रसिद्ध है और यहां अफ्रीकन चीता भी बस चुका है। वन्यजीवों के मामले में अब एमपी को एक और बड़ी सौगात मिलनेवाली है। लेसर नोन स्पीशीज पर चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन में चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन शुभरंजन सेन ने इसका ऐलान किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल्द ही स्याहगोश यानि जंगली बिल्लियों के लिए विशेष प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। लेसर नोन स्पीशीज सम्मेलन में वन्यजीव संरक्षण के नए उपायों पर चर्चा हुई। मध्यप्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े, चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन शुभरंजन सेन, मध्यप्रदेश बायोडायवर्सिटी बोर्ड के अजय यादव एवं भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. के रविचंद्रन ने संयुक्त रूप से इसका शुभारंभ किया।

सेंट्रल इंडिया में पाई जाने वाली लेसर नोन स्पीशीज पर आधारित चौथी राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन पर्यावरण परिसर, भोपाल में किया गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के पूर्व प्रोफेसर बीसी चौधरी भी उपस्थित थे।

डीसीएफ की निगरानी में ही पेड़ काटने पर जोर

प्रधान मुख्य वन संरक्षक वीएन अम्बाड़े ने कहा कि लेसर नोन में न केवल पशुवर्ग (Faun (Fauna) पर बात होनी चाहिए, बल्कि फ्लोरा पर भी चर्चा आवश्यक है। उन्होंने विकास कार्यों के दौरान घोंसले युक्त पेड़ों को हटाने में संबंधित पक्षी को नुकसान न हो, इसके लिए डीसीएफ की निगरानी में ही पेड़ काटने या हटाने पर जोर दिया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वीएन अम्बाड़े ने गोडावण को लेकर अपने प्रशासनिक अनुभव साझा किए।

चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन शुभरंजन सेन ने कहा कि लेसर फ्लोरिकन और गोडावण का गायब होना हमारी नाकामियों में से एक है। पिछले मानसून में लेसर फ्लोरिकन पर किए गए सर्वे के नतीजे उत्साहवर्धक नहीं थे। उन्होंने आयोजक संस्था सोसाइटी ऑफ नेचर हीलर्स, कंजर्वेटर एंड लोकल टूरिज्म डेवलपमेंट (एसएनएचसी) को सेमिनार को मध्यप्रदेश से सेंट्रल इंडियन लैंडस्केप तक विस्तारित करने के लिए बधाई दी।

जंगली बिल्ली पर आधारित विशेष प्रोजेक्ट

सम्मेलन में चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन शुभरंजन सेन ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश वन विभाग जल्द ही स्याहगोश (Caracal) यानि जंगली बिल्ली पर आधारित विशेष प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। यह प्रोजेक्ट गांधी सागर अभयारण्य में प्रारंभ होगा।

चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन शुभरंजन सेन ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्याहगोश को लेकर उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। इसके अलावा उन्होंने घड़ियालों की नेस्टिंग साइट को संरक्षित करने, महाशीर, विभिन्न पक्षियों और तितलियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

मध्यप्रदेश बायोडायवर्सिटी बोर्ड के अजय यादव ने कहा कि यह जानना आवश्यक है कि लेसर नोन क्षेत्रों में क्या चल रहा है। मध्यप्रदेश में कई प्रजातियां हैं जो संकटग्रस्त हैं। उन्होंने बताया कि बहुत सी प्रजातियों के बारे में यह पता नहीं है कि उनकी वर्तमान स्थिति क्या है और उनके आवास को क्या खतरा है। इस ज्ञान के अंतर को पूरा करने में यह कॉन्फ्रेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

क्या है स्याहगोश (Caracal)

स्याहगोश (Caracal) एक मध्यम आकार की फुर्तीली और शर्मीली जंगली बिल्ली है जो अपने लंबे, काले और गुच्छेदार कानों के लिए जानी जाती है। 'काला कान' (Black Ear) वाली यह बिल्ली भारत में एक दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजाति है। यह शुष्क, झाड़ीदार इलाकों में पाई जाती है।

स्याहगोश की पतली, लंबी टांगें और छोटी पूंछ होती है। इसका फर रेतीला-भूरा या लाल-भूरा होता है।
यह रात में सक्रिय (रात्रिचर) रहती है और अकेले रहना पसंद करती है। राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में बची है। यह अपनी फुर्ती और ऊंची कूद के लिए प्रसिद्ध है। उड़ते पक्षियों को हवा में ही झपट्टा मारकर पकड़ लेती है।