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राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार विजेता डॉ. आर. महालक्ष्मी बर्खास्त

MP News: भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल (IISER Bhopal) में जैविक विज्ञान विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिके नाम से छात्राओं को अश्लील संदेश भेजे गए। हाईकोर्ट ने मामले में बड़ा आदेश दिया।

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भोपाल

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Akash Dewani

Feb 27, 2026

iiser bhopal woman scientist obscene messages case high court gives big decision mp news

iiser bhopal scientist Dr. R. Mahalakshmi obscene messages case (फोटो- Patrika.com)

MP News: भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER Bhopal) में फर्जी और आपत्तिजनक ईमेल प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक डॉ. आर. महालक्ष्मी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) ने विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया।

मामला दिसंबर 2024 में उस समय सामने आया, जब पीएचडी में प्रवेश के लिए आई कुछ छात्राओं को संस्थान के प्रोफेसरों के नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाकर अश्लील और आपत्तिजनक संदेश भेजे गए। ईमेल में यहां तक लिखा गया कि पीएचडी की डिग्री हासिल करने के लिए शारीरिक शोषण जरूरी है। लगातार ऐसे संदेश मिलने से छात्राओं में हड़कंप मच गया।

7 दिसंबर 2024 को छात्राओं ने संबंधित प्रोफेसरों से शिकायत की। प्रोफेसरों ने मामले को गंभीर मानते हुए खजूरी सड़क थाने में एफआईआर दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जिन ईमेल आईडी से संदेश भेजे गए, वे फर्जी थीं और संस्थान के आधिकारिक ईमेल से उनका कोई संबंध नहीं था। बाद में प्रकरण की जांच साइबर क्राइम सेल को सौंप दी गई।

आरोपों के बाद संस्थान प्रबंधन ने डॉ. महालक्ष्मी को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की। आंतरिक जांच समिति गठित की गई, वहीं मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय सक्सेना से भी जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं और आरोपों की पुष्टि के बाद मामला बीओजी की बैठक में रखा गया।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद डॉ. महालक्ष्मी की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। संस्थान ने स्पष्ट किया कि छात्राओं की सुरक्षा और संस्थान की गरिमा सर्वोपरि है तथा किसी भी प्रकार की अनैतिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इधर, डॉ. महालक्ष्मी ने निलंबन अवधि बढ़ाए जाने के खिलाफ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हालांकि, विभागीय जांच पूरी होने और बीओजी के निर्णय के बाद उनकी सेवाएं औपचारिक रूप से समाप्त कर दी गईं।

इस कार्रवाई के बाद शैक्षणिक जगत में भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना समय की मांग है।