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बड़ा खुलासा: बच जाते अजित पवार, अगर MP से भेज दिया जाता ये एक पत्र!

Ajit Pawar Plane Crash: वीएसआर कंपनी के लियरजेट-45 विमान की खतरनाक एक्सीडेंटल और पायलट हिस्ट्री नजरअंदाज कर एमपी के अफसरों ने मुख्यमंत्री की यात्राएं कराईं। बाद में इसी विमान के हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की मौत हो गई।

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भोपाल

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Akash Dewani

Feb 01, 2026

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ajit pawar plane crash (फोटो- Patrika.com)

हरिचरण यादव

Ajit Pawar Plane Crash: वीएसआर कंपनी से संबंधित लियरजेट -45 विमान (वीटी-एसएसके), जिसमें दुर्घटना में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की मृत्यु हो गई, का उपयोग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने सितंबर 2024 से 7 सितंबर, 2025 तक उड़ानों के लिए किया था। उन्होंने कई बार राज्य के विभिन्न शहरों और अन्य राज्यों की यात्रा की।

बारामती विमान हादसे में मारे गए पायलट सुमित कपूर वही पायलट थे, जिन्होंने सीएम मोहन यादव को उड़ाया था। उन्हें पहले भी विभिन्न कारणों से निलंबित किया जा चुका है। बाद में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विमान में यात्रा करने से इनकार कर दिया। ये तथ्य पूर्व केंद्रीय उड्डयन मंत्री ने 2017 में लोकसभा में पेश किए थे। मध्य प्रदेश में सीएम के लिए विमान किराए पर लेते समय अधिकारियों ने पायलट की हिस्ट्री तक नहीं जांची। (mp news)

…तब सीएम ने हटवाया विमान

सीएम डॉ. यादव को एक अफसर ने अगस्त 2025 में प्लेन की हिस्ट्री की जानकारी दी। तब सीएम ने विमानन विभाग के अफसरों को तलब किया और बिना देरी वीएसआर कंपनी का विमान हटवाया।

एक्सीटेंडल हिस्ट्री देखे बिना सीएम के लिए हायर किया विमान

बारामती में लैंडिंग के दौरान क्रैश होने से पहले तक वीएसआर कंपनी के प्लेन की लंबी एक्सीडेंटल हिस्ट्री रही है। दुनिया भर में 49 बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुके। अंतिम हादसा 2023 में मुंबई में हुआ था। इसके बाद भी सीएम डॉ. मोहन यादव के लिए इस विमान को हायर करने से पहले अफसरों ने इसकी एक्सीडेंटल हिस्ट्री नहीं देखी।

मप्र का विमानन विभाग रिकॉर्ड में लेता तो बच जाते अजित पवार

विमानन मामलों के जानकारों का कहना है, मुख्यमंत्री की मौखिक आपत्तियों को रिकार्ड में लिया जाना था। मप्र विमानन विभाग के जिम्मेदार ऐसा करते और कंपनी व डीजीसीए को पत्र भेज देते तो ऐसे विमान को चलन से बाहर किया जा सकता था। ऐसा होता तो महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की जान बचाई जा सकती थी।

सेफ्टी ऑडिट होना चाहिए

विमान और पायलट की हिस्ट्री देखनी ही चाहिए। मप्र विमानन विभाग ने सीएम डॉ. मोहन यादव के मामले में नहीं देखी। कई स्तर पर गड़बड़ी की जा रही थी। अब भी की जा रही है। अफसरों के संज्ञान में नहीं तथ्य लाए गए थे। प्लेन का सेफ्टी ऑडिट कराना चाहिए था। - अरविंद मेहरा,डायरेक्टर, शाश्वत एविएशन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (mp news)

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