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बजट से उम्मीदें: बुजुर्ग भारत को सम्मान चाहिए ना सिर्फ आश्वासन

- रेल रियायत की बहाली और हेल्थ इंश्योरेंस पर टिकी हैं निगाहें - 26 साल पुरानी नीति में संशोधन की दरकार

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Budget expectations: Elderly India needs respect, not just assurances.

Budget expectations: Elderly India needs respect, not just assurances.

देश के करोड़ों वरिष्ठ नागरिकों के लिए केंद्रीय बजट महज आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीने की उम्मीद है। 'नेशनल पॉलिसी ऑन ओल्डर पर्सन 1999' को बने 24 साल से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप इसका संशोधित ड्राफ्ट आज भी संसद में धूल फांक रहा है। राजस्थान सहित देशभर के बुजुर्गों में सबसे गहरा आक्रोश कोरोना काल में बंद की गई रेलवे रियायत को लेकर है। वरिष्ठ जनों का कहना है कि एक तरफ सरकार भव्य स्टेशनों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बुजुर्गों के पैरों की बेड़ियां किराया बढ़ाकर कस दी गई हैं।

बुजुर्गों की मांग है कि उन्हें केवल 'वोट बैंक' न समझा जाए, बल्कि हेल्थ केयर, टैक्स छूट और सामाजिक सुरक्षा के ठोस धरातल पर अधिकार दिए जाएं। इस बार के बजट में 'सिल्वर जनरेशन' की मुस्कान वापस की उम्मीद की जा रही है। भारत की आबादी में बुजुर्गों का प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है। 1999 की नीति आज के डिजिटल और महंगे दौर में अप्रासंगिक हो चुकी है। हेल्थ इंश्योरेंस की ऊंची दरें बुजुर्गों की बचत को निगल रही हैं। अगर बजट में इनकी मांगों पर ध्यान दिया जाता है, तभी 'विकसित भारत' का सपना सार्थक होगा, क्योंकि बुजुर्गों की खुशहाली ही समाज की नींव है।

बुजुर्गों के जीवन को देगी संबल

  • स्वास्थ्य बीमा: आयु के साथ प्रीमियम न बढ़े, पुरानी बीमारियों को कवर मिले और एपीएल परिवारों के लिए दरें सस्ती हों।
  • कानूनी सुरक्षा: 'मेंटेनेंस एक्ट 2007' में बदलाव हो। ट्रिब्यूनल में वकीलों का प्रवेश वर्जित हो ताकि केस लटके नहीं। 10 हजार की मेंटेनेंस सीमा खत्म कर बच्चों की हैसियत के अनुसार तय हो।
  • सुरक्षा और सम्मान: अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए पुलिस बीट व्यवस्था अनिवार्य हो। हर जिले में 'जेरिएट्रिक वार्ड' (वृद्ध रोग विभाग) और 'वरिष्ठ जन भवन' बने।
  • आर्थिक राहत: गैर-पेंशनभोगी बुजुर्गों को एफडी पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज मिले। 'सहारा' और 'आदर्श' जैसी सोसायटियों में फंसा पैसा वापस दिलाया जाए।
  • परिवहन: रोडवेज की डीलक्स और सुपर डीलक्स बसों में 50 प्रतिशत की छूट मिले और 5 सीटें आरक्षित हों।

रेलवे रियायत हमारा अधिकार था, जिसे आपदा के नाम पर छीना गया। इसे तुरंत बहाल करना ही सरकार की बुजुर्गों के प्रति ईमानदारी का प्रमाण होगा।

मदन खटोड़, अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक मंच (संस्थान) भीलवाड़ा

हर अस्पताल में बुजुर्गों के लिए अलग जेरिएट्रिक वार्ड और मोहल्ला क्लीनिक होने चाहिए। उम्र के इस पड़ाव पर मुफ्त और त्वरित चिकित्सा ही सबसे बड़ा सम्मान है।

वीणा खटोड़, महिला सचिव

मेंटेनेंस एक्ट में संशोधन जरूरी है। ट्रिब्यूनल कोर्ट में बुजुर्गों को न्याय के लिए वकीलों के चक्कर न काटने पड़ें, वहां सीधे सुनवाई और त्वरित फैसले होने चाहिए।

प्रमोद कुमार तोषनीवाल. कार्यकारिणी सदस्य

राजस्थान में केंद्र की तर्ज पर 'वरिष्ठ जन आयोग' बने। जब तक हमारी समस्याओं के लिए अलग संवैधानिक निकाय नहीं होगा, नीतियां केवल कागजों तक सीमित रहेंगी।

कैलाश पुरोहित, कार्यकारिणी सदस्य

पेंशन विहीन बुजुर्गों के लिए 2 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज जीवनदान साबित होगा। साथ ही कोऑपरेटिव सोसायटियों में फंसी उनकी गाढ़ी कमाई वापस दिलाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान हो।

कैलाश चंद्र सोमानी, सह सचिव

अकेले रहने वाले बुजुर्गों में असुरक्षा का भाव है। पुलिस बीट प्रणाली को प्रभावी बनाना और हर जिले में सामुदायिक केंद्र उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

राकेश कुमार सक्सेना

वरिष्ठ नागरिकों ने ब्याज के लालच में सहारा व आदर्श जैसी संस्थानों में राशि का इन्वेस्टमेंट किया है, लेकिन यह बंद है। इन संस्थानों में जमा राशि लौटने का प्रयास किया जाए।

मूलचंद बाफना, कोषाध्यक्ष