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Labor Code Protest: BSP के बाहर 7 यूनियनों का संयुक्त प्रदर्शन, चार श्रम संहिताएं रद्द करने की मांग

Labor Code Protest: यूनियन नेताओं ने श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए निजीकरण रोकने, वेतन समझौता पूरा करने और 26 हजार रुपये राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग उठाई।

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7 यूनियनों का संयुक्त प्रदर्शन (photo source- Patrika)

7 यूनियनों का संयुक्त प्रदर्शन (photo source- Patrika)

Labor Code Protest: अप्रैल 2026 से चार नए लेबर कोड लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इसी सिलसिले में गुरुवार को सात लेबर ऑर्गनाइजेशन ने भिलाई स्टील प्लांट की मेन रोड पर मिलकर प्रदर्शन किया। यूनियन नेताओं ने सरकार के फैसले के खिलाफ कड़ा विरोध जताने के लिए सड़क जाम कर दी।

Labor Code Protest: 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान

दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों, इंडिपेंडेंट फेडरेशन और अलग-अलग इंडस्ट्री-बेस्ड ऑर्गनाइज़ेशन ने 12 फरवरी को देश भर में हड़ताल का ऐलान किया है। यूनियनों का आरोप है कि प्रपोज़्ड लेबर लॉ मज़दूरों के हितों के खिलाफ हैं और उनके लागू होने से ऑर्गेनाइज़्ड और अनऑर्गनाइज़्ड, दोनों सेक्टर में नौकरी की स्टेबिलिटी पर असर पड़ेगा।

भारत-अमेरिका डील पर भी उठाए सवाल

सेंट्रल स्टील वर्कर्स यूनियन (ACTU) के जनरल सेक्रेटरी विजेंद्र तिवारी ने केंद्र सरकार पर इंडिया-US एग्रीमेंट से मुकरने का आरोप लगाया। डील कैंसिल करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यह आंदोलन नेशनल लेवल पर चल रहा है और इसे सभी लेबर ऑर्गनाइज़ेशन का सपोर्ट है। उनकी मुख्य मांगों में चारों लेबर कोड को रद्द करना, कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम खत्म करना और पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज का प्राइवेटाइजेशन रोकना शामिल है।

कार्य अवधि बढ़ाने और वेतन कटौती का आरोप

भिलाई स्टील मज़दूर सभा (AITUC) के जनरल सेक्रेटरी विनोद कुमार सोनी ने कहा कि नए लेबर कोड से काम के घंटे आठ घंटे से बढ़कर 12 घंटे हो सकते हैं। मैनेजमेंट को महिला कर्मचारियों से नाइट शिफ्ट में काम करवाने का भी अधिकार होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिना पहले से बताए एक दिन की गैरहाज़िरी के लिए आठ दिन की सैलरी काटने का नियम बनाया जा सकता है, जो मज़दूरों के हित में नहीं है।

स्थाई नौकरी खत्म होने की आशंका

Labor Code Protest: लोईमू यूनियन के महासचिव सुरेंद्र मोहंती ने कहा कि प्रस्तावित नियमों के तहत 300 से कम कर्मचारियों वाले कारखानों को कुछ प्रावधानों से छूट दी जा सकती है। इससे स्थाई आदेश लागू नहीं होंगे और ले-ऑफ के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता भी समाप्त हो सकती है। यूनियनों का कहना है कि इससे स्थाई रोजगार की व्यवस्था कमजोर होगी और कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा।

11 सूत्रीय मांगों पर अड़ी यूनियनें

भिलाई में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AITU, LOIMU और स्टील वर्कर्स यूनियन मिलकर विरोध कर रहे हैं। संगठनों ने SAIL कर्मचारियों के लिए 2017 से पेंडिंग वेतन समझौते को तुरंत पूरा करने और 39 महीने के बकाया एरियर का पेमेंट करने की भी मांग की है।

इसके अलावा, चारों लेबर कोड रद्द करने, प्राइवेटाइजेशन पर रोक लगाने, पक्की भर्ती पक्की करने और सभी कर्मचारियों के लिए 26,000 रुपये प्रति महीने का नेशनल मिनिमम वेतन लागू करने समेत 11 बड़ी मांगों को लेकर विरोध जारी है।