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बरेली हिंसा का आरोपी चूरन गैंग का खुलेआम ऐलान, “मेरा गुरूर सलामत रहे”, पुलिस बेबस, दबंग रील से दे रहे कानून को खुली चुनौती

बरेली। मुकदमा दर्ज हुए एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन बवाल के आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उल्टा हाल यह है कि हमलावर खुलेआम सोशल मीडिया पर रील डालकर पुलिस और कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती दे रहे हैं। हिस्ट्रीशीटर सुभान उर्फ चूरन की गिरफ्तारी के बाद भी उसका गिरोह बेखौफ घूम रहा है और शहर में खौफ का माहौल कायम किए हुए है।

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बरेली। मुकदमा दर्ज हुए एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन बवाल के आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उल्टा हाल यह है कि हमलावर खुलेआम सोशल मीडिया पर रील डालकर पुलिस और कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती दे रहे हैं। हिस्ट्रीशीटर सुभान उर्फ चूरन की गिरफ्तारी के बाद भी उसका गिरोह बेखौफ घूम रहा है और शहर में खौफ का माहौल कायम किए हुए है।

जसौली निवासी सलमान पर हुए हमले के आरोपी, सुभान गैंग के अमान इब्राहिम, वसीम गद्दी, अनम गद्दी सहित छह अज्ञात अब भी फरार हैं। स्पर्श लॉन के पास दिनदहाड़े तमंचे लहराने, मारपीट और दहशत फैलाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

दबंग रील, तमंचे और पुलिस की कैप… खुलेआम ताकत का प्रदर्शन

अमान इब्राहिम के तमंचों के साथ फोटो और पुलिस की कैप पहनकर बनाई गई रीलें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। संदेश साफ है, कानून हमारे लिए मज़ाक है। किला इलाके के शातिर भी इस गैंग में शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें से एक बदमाश पीलीभीत में जैकेट व्यापारी से लूट की वारदात में नामजद रह चुका है।

रसूख, पैसे और सड़क पर स्टंट, इलाका जंग का मैदान

गैंग के अधिकतर सदस्य या तो रसूखदार परिवारों से हैं या अपराध से मोटी कमाई कर रहे हैं। दो तीन कारों में घूमकर डोहरा रोड और रामगंगानगर इलाके में स्टंटबाजी, हुड़दंग और राहगीरों से मारपीट अब रोज़मर्रा की कहानी बन चुकी है। पीटकर भाग जाना और फिर सोशल मीडिया पर अकड़ दिखाना, यही इनका नया पैटर्न है।

कारों की तलाश, पर आरोपी अब भी आज़ाद

पुलिस सलमान पर हमले में इस्तेमाल की गई कारों को ट्रेस करने की बात कह रही है। दावा है कि अमान इब्राहिम समेत अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। सीओ तृतीय पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि बवाल में भूमिका सामने आने पर संबंधित मामलों में नाम जोड़कर सख्त कार्रवाई होगी।

सवाल सीधा है, कब टूटेगा गुरूर?

एक हफ्ते बाद भी गिरफ्तारी नहीं, और दबंगों की खुली चुनौती क्या कानून का डर खत्म हो चुका है? शहर जवाब मांग रहा है, क्योंकि जब आरोपी रील बनाकर ऐलान कर रहे हों और पुलिस सिर्फ जांच जारी कह रही हो, तो यह सिर्फ एक केस नहीं, पूरी कानून-व्यवस्था की साख पर सवाल खड़ा हो जाता है।

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