
हिस्ट्रीशीटर कन्हैया गुलाटी
बरेली। शहर में करोड़ों की ठगी कर फरार चल रहे महाठग कन्हैया गुलाटी के खिलाफ आखिरकार पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। हिस्ट्रीशीट खुलते ही बारादरी थाने में एक के बाद एक चार नए मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। अब तक उसके खिलाफ 55 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। फिर भी पीड़ितों की कतार लंबी होती जा रही है और पुलिस अब खुलकर कार्रवाई के मूड में दिख रही है।
हिस्ट्रीशीट खुलने के साथ ही बारादरी थाने में ठगी के चार बड़े मुकदमे दर्ज हुए। इज्जतनगर के करमपुर चौधरी निवासी फरीद खान ने 20 लाख रुपये की ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मीरगंज के विक्रम कुमार मौर्य ने 5 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया। सिद्धार्थनगर निवासी सुनील कुमार सिंह ने 38 लाख रुपये की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया। वहीं सिद्धार्थनगर निवासी दिलीप कुमार ने 5.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। एक ही दिन में हुए इन 4 मुकदमों के दर्ज होते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।
माडल टाउन निवासी कन्हैया गुलाटी ने निवेश के नाम पर ऐसा जाल बिछाया कि हजारों लोग उसमें फंस गए। उसने 20 माह तक हर महीने पांच प्रतिशत मुनाफा देने और 22 माह बाद पूरी रकम लौटाने का लालच दिया। इतना ही नहीं, रकम वापस न लेने पर उसी कीमत का प्लॉट देने का वादा भी किया गया। शुरुआत में कुछ महीनों तक मुनाफा देकर भरोसा जीता गया, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया गया। जब निवेशकों ने दबाव बनाया तो पहले टालमटोल और फिर सीधा फरार, यही रहा गुलाटी का खेल।
गुलाटी ने आलीशान अपार्टमेंट बनाने का सपना दिखाकर भी कई लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए। निवेशकों को सुनहरे भविष्य का भरोसा दिलाया गया, लेकिन हकीकत में उन्हें मिला सिर्फ धोखा। अब तक गुलाटी, उसकी पत्नी राधिका गुलाटी, बेटा और अन्य साथियों के खिलाफ 55 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इनमें 16 पुराने और 35 मुकदमे नवंबर से जनवरी के बीच दर्ज किए गए हैं। बावजूद इसके, गुलाटी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है।
ठगी के इस खेल में राजेश मौर्य भी बड़ा नाम है। श्री गंगा इंफ्रासिटी का निदेशक रह चुका मौर्य सात साल पहले जमीन में निवेश के नाम पर करीब 300 करोड़ रुपये समेटकर फरार हो गया था। लगातार मुकदमे दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसके खाते फ्रीज किए, लेकिन तब तक रकम निकाली जा चुकी थी। चेक बाउंस के मामले में गैरजमानती वारंट जारी होने के बाद बारादरी पुलिस ने उसे पिछले साल मई में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उसके खिलाफ कुल 34 मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद आरोपित की निगरानी बेहद सख्त हो जाती है। बीट कांस्टेबल लगातार गतिविधियों पर नजर रखता है। थाने में फोटो, रिश्तेदारों और पते का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। जरूरत पड़ने पर थाने बुलाकर पूछताछ भी की जाती है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि फरार चल रहे कन्हैया गुलाटी के खिलाफ जल्द ही और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
हजारों करोड़ की ठगी से टूट चुके निवेशकों को अब उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद प्रशासनिक दबाव बढ़ा है और पुलिस की कार्रवाई तेज हुई है। अब सवाल सिर्फ इतना है, क्या महाठग जल्द सलाखों के पीछे होगा, या फिर कानून से बचने का कोई और दांव खेलेगा? बरेली की नजरें अब पुलिस की अगली चाल पर टिकी हैं।
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Published on:
08 Feb 2026 12:50 pm
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