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IT नौकरी नहीं, साइबर कैदखाना है विदेश, म्यांमार में बंधक बरेली के सात लौटे, फेसबुक से ब्लैकमेल तक का काला खेल उजागर

म्यांमार में भारतीय युवाओं को बंधक बनाकर साइबर ठगी कराने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के चंगुल से बरेली मंडल के सात युवक-युवतियों को भारत की खुफिया एजेंसियों ने मुक्त कराया है। सभी को सुरक्षित भारत लाकर उनके स्वजन के सुपुर्द कर दिया गया है।

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बरेली। म्यांमार में भारतीय युवाओं को बंधक बनाकर साइबर ठगी कराने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के चंगुल से बरेली मंडल के सात युवक-युवतियों को भारत की खुफिया एजेंसियों ने मुक्त कराया है। सभी को सुरक्षित भारत लाकर उनके स्वजन के सुपुर्द कर दिया गया है। डीआईजी बरेली रेंज अजय साहनी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पूरे प्रकरण की जांच साइबर थाना पुलिस को सौंपी गई है।

डीआईजी अजय साहनी ने बताया कि नवंबर 2025 में म्यांमार में सक्रिय साइबर ठगी के स्कैम कंपाउंड्स से कुल 270 भारतीय नागरिकों को मुक्त कराया गया था। इनमें बरेली, बदायूं और पीलीभीत जनपद के सात युवक-युवतियां शामिल हैं। सभी लंबे समय से दक्षिण एशियाई देशों में संचालित साइबर ठगी नेटवर्क में जबरन काम करने को मजबूर थे।

आईटी नौकरी का झांसा देकर विदेश बुलाया

पुलिस जांच में सामने आया कि पीड़ित युवक-युवतियां आईटी सेक्टर से जुड़े हुए थे। ठगों ने उन्हें डाटा एंट्री ऑपरेटर, गेमिंग प्रोग्रामिंग जैसी आकर्षक नौकरियों का लालच दिया था। हर माह 70 से 80 हजार रुपये वेतन का झांसा देकर पहले थाईलैंड बुलाया गया, जहां उन्हें फाइव स्टार होटल में ठहराया गया।

थाईलैंड से अवैध तरीके से म्यांमार ले जाया

डीआईजी ने बताया कि थाईलैंड पहुंचने के बाद पीड़ितों को ट्रक और फिर नदी के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार ले जाया गया। वहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट, वीजा और अन्य दस्तावेज छीन लिए गए और उन्हें बंधक बना लिया गया। पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि म्यांमार में साइबर ठगी का संचालन चीनी नागरिकों द्वारा किया जा रहा था। पहले उन्हें ट्रेनिंग दी गई, फिर फेसबुक पर भारतीय लड़कियों के नाम से फर्जी आईडी बनवाकर लोगों को फंसाने का काम सौंपा गया। जैसे ही कोई व्यक्ति जाल में फंसता, उसकी आईडी और पासवर्ड सीनियर को देना होता था।

ब्लैकमेल कर ऐंठी जाती थी रकम, सात लोग कराए गए मुक्त

डीआईजी अजय साहनी के अनुसार, फंसे हुए लोगों को ब्लैकमेल कर उनसे पैसे ऐंठने का काम सीनियर ठग करते थे। पीड़ितों को मानसिक और शारीरिक दबाव में रखकर लगातार काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। मुक्त कराए गए लोगों में बरेली के शुमान्शु गुप्ता, रवि राजपूत, सहर जेरहा और विनीत शर्मा शामिल हैं। इसके अलावा बदायूं की सपना तथा पीलीभीत के आदिल खान और अकरम रजा को भी सुरक्षित स्वदेश लाया गया है।

साइबर नेटवर्क की जांच जारी

डीआईजी अजय साहनी ने बताया कि साइबर थाना पुलिस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले संदिग्ध ऑफर से सतर्क रहें और किसी भी स्थिति में बिना सत्यापन विदेश न जाएं।