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बरेली, May 30, 2026

मनौना धाम किडनैपिंग कांड का पर्दाफाश: ₹1.20 लाख में बच्चा बेचने की साजिश नाकाम, पश्चिम बंगाल का गैंग लीडर समेत 4 गिरफ्तार

Bareilly News: बरेली के मनौना धाम से डेढ़ वर्षीय मासूम ऋषभ के अपहरण मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने बच्चा बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

Police busted a child-lifting gang

पुलिस ने बच्चा चोर गैंग का खुलासा किया (फोटो- पत्रिका)

Bareilly News: मनौना धाम से डेढ़ वर्षीय मासूम ऋषभ के अपहरण मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए बच्चा बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने गिरोह के कथित सरगना समेत 3 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह अस्पतालों, मंदिरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से छोटे बच्चों का अपहरण कर उन्हें लाखों रुपये में बेचता था।

24 मई को मनौना धाम परिसर में सफाई कर्मचारी रमन का डेढ़ साल का बेटा ऋषभ खेलते समय अचानक लापता हो गया था। बच्चे के गायब होने से परिवार में कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही आंवला पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मासूम की तलाश शुरू कर दी थी।

मुठभेड़ के बाद खुलीं अपहरण की परतें

जांच के दौरान 27 मई को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद योगेश कन्नौजिया और पवन चंदेल को गिरफ्तार किया। दोनों की निशानदेही पर अपहृत मासूम ऋषभ को सकुशल बरामद कर परिजनों के हवाले कर दिया गया। इसके बाद पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम सामने आए और पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी।

पुलिस जांच में उत्तम वाजपेई का नाम सामने आने पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसके बाद मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने गिरोह के कथित सरगना 60 वर्षीय संजय कुमार विश्वास, केशवराम उर्फ मंजेश और सीता को गिरफ्तार कर लिया। संजय कुमार विश्वास पश्चिम बंगाल का रहने वाला बताया गया है।

अस्पताल और मंदिर थे गिरोह के आसान निशाने

पूछताछ में आरोपियों ने कई चौंकाने वाले राज उगले हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अस्पतालों, मंदिरों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर छोटे बच्चों की रेकी करता था। मौका मिलते ही बच्चों का अपहरण कर उन्हें दूसरे राज्यों में बेच दिया जाता था। एक बच्चे की कीमत करीब 1.20 लाख रुपये तय की जाती थी। जांच में सामने आया है कि गिरोह की सदस्य सीता बच्चों को खरीदारों तक पहुंचाने और सौदेबाजी कराने में अहम भूमिका निभाती थी। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह पहले भी कई बच्चों की तस्करी कर चुका है और इसके तार कई जिलों व राज्यों से जुड़े हो सकते हैं।

कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

गिरफ्तार आरोपी लखीमपुर खीरी, बदायूं, सीतापुर और पश्चिम बंगाल से जुड़े हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उन लोगों की तलाश कर रही है जो अपहृत बच्चों को खरीदते थे। मामले में कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व एसपी साउथ अंशिका वर्मा की निगरानी में किया गया। मामले के सफल खुलासे और मासूम की सकुशल बरामदगी पर वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की है। पुलिस ने कहा है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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