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लाड़ो की सुरक्षा के लिए लाड़लों को करना होगा जागरूक

-छेड़छाड़, बलात्कार, उत्पीडऩ व घरेलू हिंसा की शिकार हो रही महिलाएं, वर्ष 2025 में दर्ज घटनाओं में हुई 10 फीसदी कमी, कार्यशाला कर बढ़ाएंगे जागरूकताबारां. लाड़ों की सुरक्षा केवल कानून से नहीं होगी, बल्कि लाडलों की सोच में भी बदलाव लाना होगा। समाज में बढ़ती छेड़छाड़, बलात्कार, उत्पीडऩ और घरेलू हिंसा की घटनाएं इस बात […]

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बारां

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Mukesh Gaur

Feb 06, 2026

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हिंसा और यौन अपराधों के मामलों में पीडि़त महिलाओं को त्वरित न्याय और परामर्श सुविधा मिले। थानों में महिला हेल्प डेस्क को और मजबूत किया जाए तथा शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को संवेदनशील बनाया जाए।

बारां. एक स्कूल में बालिकाओं को जानकारी देने के दौरान मौजूद कालिक टीम की महिला पुलिस।

-छेड़छाड़, बलात्कार, उत्पीडऩ व घरेलू हिंसा की शिकार हो रही महिलाएं, वर्ष 2025 में दर्ज घटनाओं में हुई 10 फीसदी कमी, कार्यशाला कर बढ़ाएंगे जागरूकता

बारां. लाड़ों की सुरक्षा केवल कानून से नहीं होगी, बल्कि लाडलों की सोच में भी बदलाव लाना होगा। समाज में बढ़ती छेड़छाड़, बलात्कार, उत्पीडऩ और घरेलू हिंसा की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि महिला सुरक्षा के लिए जागरूकता को व्यवहार और संस्कार से जोडऩा जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पुरुष वर्ग जिम्मेदारी और संवेदनशीलता नहीं समझेगा तब तक केवल सख्त कानून भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगे। जिले में पिछले वर्ष नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 37 प्रकरण दर्ज किए गए और बालिग से दुष्कर्म के मामले तो इससे काफी अधिक है। वहीं, दहेज प्रताडऩा के मामलों में भी वृद्धि हुई है। हालांकि अपहरण ओर कुल सालभर में दर्ज प्रकरणों की संख्या में कुछ कमी आई है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर इसमें और कमी के लिए जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। कार्रवाई के साथ समझाइश भी हो

वर्तमान में भी कई महिलाएं घर, परिवार, कार्यस्थल और शिक्षण संस्थानों में असुरक्षा का सामना कर रही हैं। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में पढऩे वाली छात्राएं आए दिन उत्पीडऩ का शिकार हो रही हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका केवल कार्रवाई तक सीमित न रहकर मार्गदर्शन तक होनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों में नियमित रूप से संस्कार क्लासेज और कानूनी जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएं। उनमें छात्र-छात्राओं को समानता, सम्मान और कानून की जानकारी दी जाए।सामाजिक संगठन करें पहलमहिला सुरक्षा को लेकर विभिन्न सामाजिक और महिला संगठनों को भी आगे आना होगा। गांव-शहर स्तर पर जागरूकता कार्यशालाएं, नुक्कड़ नाटक, संवाद कार्यक्रम और अभिभावक बैठकों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सकता है। इन कार्यक्रमों में यह स्पष्ट किया जाए कि महिलाओं के खिलाफ अपराध केवल कानूनन अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध भी हैं।मिले सम्मान और सुरक्षित व्यवहारविशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हिंसा और यौन अपराधों के मामलों में पीडि़त महिलाओं को त्वरित न्याय और परामर्श सुविधा मिले। थानों में महिला हेल्प डेस्क को और मजबूत किया जाए तथा शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को संवेदनशील बनाया जाए। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर युवाओं को महिला सम्मान और सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक किया जाए।

-महिला और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर जिले में निर्भया और कालिका पेट्रोलिंग यूनिट संभावित महिला अपराध के चिन्हित स्थलों पर गश्त करती है। इससे जिले में वर्ष 2024 से 2025 में महिला अपराधों मेंं करीब 10 फीसदी की कमी आई है। कार्यशालाएं भी जाती है और कार्यशाला कर युवाओं को जागरूक किया जाएगा।

-राजेश चौधरी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक