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‘केपीएस मैग्नेट’ के नाम पर सरकारी स्कूलों की बंदी के खिलाफ छात्र संगठनों ने खोला मोर्चा

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआइएसएफ), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआइ), ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (एआइडीएसओ) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआइएसए) ने मंगलवार को शहर के गांधी भवन में एक संयुक्त सम्मेलन आयोजित कर ‘केपीएस मैग्नेट’ KPS-MAGNET परियोजना की आड़ में 25,000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के फैसले का कड़ा […]

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‘केपीएस मैग्नेट’ परियोजना

‘केपीएस मैग्नेट’ परियोजना की आड़ में 25,000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआइएसएफ), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआइ), ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (एआइडीएसओ) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआइएसए) ने मंगलवार को शहर के गांधी भवन में एक संयुक्त सम्मेलन आयोजित कर ‘केपीएस मैग्नेट’ KPS-MAGNET परियोजना की आड़ में 25,000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया।

केंद्र-राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल

ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमेटी के राज्य उपाध्यक्ष वी.एन. राजशेखर ने कहा कि पुनर्जागरण आंदोलन के अग्रदूतों और स्वतंत्रता सेनानियों ने हर गांव तक शिक्षा पहुंचाने का सपना देखा था। इसके विपरीत, आज केपीएस मैग्नेट स्कूलों के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1986 की राजीव गांधी सरकार की शिक्षा नीति से लेकर मोदी सरकार की नीतियों तक शिक्षा को पूंजीपतियों के लाभ का साधन बनाने की साजिश रची गई है और केपीएस मैग्नेट इसी नीति का नया रूप है।

शिक्षा के निजीकरण की साजीश का आरोप

अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन के राज्य अध्यक्ष एम. शशिधर ने कहा कि केपीएस मैग्नेट के माध्यम से बच्चों को 3 से 5 किलोमीटर दूर स्कूलों में भेजा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि रोज खेतों में काम करने वाले भूमिहीन और गरीब किसान-मजदूर अपने बच्चों को इतनी दूर कैसे भेजेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लड़कियों को शिक्षा से वंचित किया गया तो बाल विवाह को बढ़ावा मिलेगा।

गरीब परिवारों और बालिकाओं की शिक्षा पर खतरा

आंगनवाड़ी संगठन की सुनंदा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें एक ही तरह से काम कर रही हैं। एक ओर किसान-मजदूर विरोधी नीतियों से आम लोगों को संकट में डाला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उनके बच्चों की शिक्षा छीनी जा रही है।

मध्याह्न भोजन कर्मियों की आजीविका खतरे में

कर्नाटक राज्य अक्षर दसोहा संगठन की राज्य सचिव मालिनी मेस्ता ने कहा कि कर्नाटक में स्कूल से बाहर बच्चों की संख्या पहले ही 22 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। शिक्षा मंत्री के दावों के बावजूद केपीएस मैग्नेट के तहत 25,000 से अधिक स्कूल बंद किए जा रहे हैं, जिससे लाखों बच्चे शिक्षा से बाहर हो जाएंगे और 40,000 से अधिक मध्याह्न भोजन कर्मियों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।

आंगनवाड़ी-मिड डे मील संगठन के राज्य संयोजक अमजद ने कहा कि भाजपा की एनइपी-2020 का विरोध करने वाली कांग्रेस सरकार भी थोराट समिति की एसइपी रिपोर्ट पर चुप है और एनइपी मॉडल पर ही स्कूल बंद किए जा रहे हैं।

सम्मेलन में पारित प्रस्ताव

-शिक्षा विशेषज्ञों, अभिभावक संघों और छात्र नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या से मुलाकात करेगा।

- राज्य के सभी तालुकों और गांवों में स्कूल बचाओ आंदोलन चलाया जाएगा।

- मार्च बजट सत्र से पहले सभी वाम छात्र संगठनों द्वारा संयुक्त राज्य-स्तरीय विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

- राज्य सरकार एडीबी से लिए गए ऋण की शर्तों को सार्वजनिक करे।

-सरकारी स्कूलों को सशक्त किया जाए और बजट भाषण में केपीएस मैग्नेट परियोजना को वापस लेने की घोषणा की जाए।