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‘खुद के घर में आग लगी है, फिर भी ईरान-अमेरिका के मसले सुलझा रहा’, पाक पर बांग्लादेशी अखबार का करारा तंज

Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान दुनिया में शांति का दूत बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन घरेलू आर्थिक संकट, महंगाई, बालोचिस्तान अशांति, भारत-अफगानिस्तान तनाव और आतंकवाद की आग उसे परेशान कर रही है। बांग्लादेशी अखबार ने तंज कसा है।

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पाक PM शहबाज शरीफ (ANI)

बांग्लादेश की अखबार 'ढाका ट्रिब्यून' ने पाकिस्तान पर करारा तंज कसा है। उसने साफ कहा है कि पाकिस्तान दुनिया में शांति के लिए बड़ी भूमिका निभाने का सपना देख रहा है, लेकिन उसके अपने घर में ही आग लगी हुई है।

दरअसल, अमेरिका-ईरान विवाद में मध्यस्थ बनने के लिए पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी ईरान पहुंचे हैं।

उधर, उनके देश के अंदर आर्थिक संकट, बलूचिस्तान की अशांति, भारत-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव और आतंकवाद की आग बुझाने का कोई ठोस प्लान नजर नहीं आ रहा।

ढाका ट्रिब्यून में तंजीना अमान तंजुम ने लिखा है कि पाकिस्तान की ये कोशिशें उसकी मजबूरी को छुपाने की कोशिश लगती हैं।

घरेलू आर्थिक हालात बेहद खराब

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था आईएमएफ के कर्ज के बिना चलना मुश्किल हो गया है। विदेशी मुद्रा भंडार बार-बार इतना कम हो जाता है कि आयात के लिए पैसे जुटाना बड़ी समस्या बन जाता है।

पेट्रोल की कमी, बिजली के महंगे बिल और रोजमर्रा की चीजों के आसमान छूते दाम आम लोगों की जिंदगी नर्क बना रहे हैं। मध्यम वर्ग अब छोटी-छोटी खर्चों पर भी कटौती कर रहा है।

छोटे व्यापार बंद होने के कगार पर हैं और युवा पीढ़ी विदेश भागने के लिए बेताब है। तंजुम ने आगे लिखा कि बिना कर्ज के अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना पाकिस्तान के लिए लगभग नामुमकिन हो गया है।

पड़ोसियों से रिश्ते तनावपूर्ण

अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का रिश्ता हमेशा अस्थिर रहा है। तालिबान, टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) और सीमा पर होने वाली झड़पें दोनों देशों के बीच शांति नहीं आने दे रही हैं।

भारत के साथ तो हालात और भी गंभीर हैं। कश्मीर मुद्दा, सीमा पर गोलीबारी और राजनीतिक तनाव कभी-कभी परमाणु युद्ध की आशंका तक ले जाते हैं। दोनों देशों के बीच विश्वास की पूरी कमी है।

आतंकवाद और बलूचिस्तान की समस्या

टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) पाकिस्तान के अंदर बड़े हमले करते रहते हैं। इन हमलों से सुरक्षा बलों को लगातार नुकसान हो रहा है।

बलूचिस्तान में अलगाववाद की आग अभी भी सुलग रही है। देश के अंदर ये सब समस्याएं होने के बावजूद पाकिस्तान खुद को वैश्विक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

ईरान मध्यस्थता के पीछे अपनी मजबूरी

तंजुम के अनुसार पाकिस्तान के पास अपना स्वार्थ भी है। अगर मध्य पूर्व में लड़ाई लंबी खिंची तो तेल के दाम बढ़ेंगे, जिससे पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था और बिगड़ जाएगी।

साथ ही देश में बड़ी संख्या में शिया आबादी है, इसलिए ईरान में अस्थिरता यहां सांप्रदायिक तनाव भड़का सकती है। इसीलिए पाकिस्तान इस विवाद को सुलझाने में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है। लेकिन आलोचक कहते हैं कि पहले घर की समस्याओं को सुलझाओ, फिर दुनिया की समस्याएं सुलझाने निकलो।

पाकिस्तान की ये स्थिति दिखाती है कि वैश्विक पटल पर चमकने की कोशिश में अंदरूनी कमजोरियां नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं। आम पाकिस्तानी नागरिक महंगाई, बेरोजगारी और असुरक्षा से जूझ रहा है, जबकि नेतृत्व बड़े-बड़े मंचों पर शांति का संदेश दे रहा है।