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एआई की ट्रेनिंग के लिए वर्कर्स की स्क्रीन-कीबोर्ड-माउस की हरकत पर नज़र रखेगा मेटा

Meta's New Policy: मेटा अब वर्कर्स की स्क्रीन-कीबोर्ड-माउस की हरकत पर नज़र रखेगा। क्या है इसकी वजह? आइए नज़र डालते हैं।

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फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram), वॉट्सऐप (WhatsApp) की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) अमेरिका (United States of America) में काम करने वाले अपने वर्कर्स के कंप्यूटरों पर नया सॉफ्टवेयर शुरू कर रही है। यह सॉफ्टवेयर वर्कर्स की कीबोर्ड पर टाइपिंग, माउस की हरकतें, क्लिक करने की जगह और स्क्रीन पर क्या चल रहा है, इन सबको रिकॉर्ड करेगा। कंपनी का कहना है कि इसका मकसद अपने एआई सिस्टम्स (AI Systems) को ट्रेन करना है, जिससे एआई यह समझ सके कि लोग कंप्यूटर पर रोजमर्रा के काम कैसे करते हैं।

असली उदाहरणों की ज़रूरत

मेटा के अनुसार अगर एआई को यह सिखाना है कि इंसान कंप्यूटर पर काम कैसे करता है तो उसे असली उदाहरणों की जरूरत है। कंपनी चाहती है कि कर्मचारियों के रोज के कामकाज से एआई सीखे, जिससे ट्रेनिंग आसान हो सके।

वर्कर्स को प्राइवेसी की चिंता

इस फैसले के बाद कंपनी के अंदर काफी नाराज़गी देखने को मिली। कई वर्कर्स ने कहा कि उन्हें यह कदम असहज महसूस करा रहा है। कुछ वर्कर्स ने पूछा कि क्या वो इस ट्रैकिंग से बाहर निकल सकते हैं। इस पर मेटा के सीटीओ एंड्रयू बॉसवर्थ (Andrew Bosworth) ने साफ कहा कि कंपनी के कंप्यूटर/लैपटॉप पर इस सिस्टम से बाहर निकलने का कोई ऑप्शन नहीं है। कंपनी के अंदरूनी प्लेटफॉर्म पर इस घोषणा पर सबसे ज़्यादा नाराज़गी वाली प्रतिक्रिया आई है।

संवेदनशील जानकारी नहीं लेने की कही बात

मेटा ने अपनी सफाई में कहा है कि इस डेटा का इस्तेमाल किसी और काम के लिए नहीं होगा। यह ट्रैकिंग सिर्फ कंप्यूटर तक सीमित रहेगी, वर्कर्स के फोन पर लागू नहीं होगी। यह कुछ चुनिंदा वर्क ऐप्स जैसे - जीमेल, जीचैट और मेटा के इंटरनल एआई असिस्टेंट मेटामेट पर काम करेगी। संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए सेफगार्ड्स लगाए गए हैं। मेटा का यह भी कहना है कि वर्कर्स की निगरानी पहले से कंपनी डिवाइसेज़ पर होती रही है और ऑनबोर्डिंग के समय वर्कर्स को इसकी जानकारी दी जाती है।