# उदयपुर

करोड़ों की जमीन पर एक्शन के बाद परतें खुली ..भू-माफिया में हड़कंप; पुलिस-प्रशासनिक गठजोड़ की चर्चाएं गर्म

शिल्पग्राम के पीछे करीब 70 करोड़ रुपए मूल्य की 1.75 लाख वर्गफीट सरकारी भूमि से यूडीए ने अतिक्रमण हटाकर कई अवैध निर्माण ध्वस्त किए। कार्रवाई के बाद भूमाफिया, कब्जाधारियों और कथित पुलिस-प्रशासनिक गठजोड़ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जबकि बिजली कनेक्शन जारी होने पर भी सवाल उठे हैं।

2 min read
उदयपुर में अतिक्रमण स्थल पर कार्रवाई के दौरान जमा लोग। पत्रिका

उदयपुर. शिल्पग्राम के समीप करीब 70 करोड़ मूल्य की सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की कार्रवाई के बाद भूमि दलालों और अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान सामने आए तथ्यों और पुलिसकर्मियों के कथित गठजोड़ की चर्चाओं ने मामले को और गंभीर बना दिया है। यूडीए अधिकारी अब मौके पर किए बिजली कनेक्शन, अवैध बाउंड्रीवाल, निर्माण गतिविधियों और संचालित लग्जरी विला से जुड़े दस्तावेज की जांच कर रहे हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।यूडीए ने मंगलवार को कार्रवाई करते हुए करीब 1.75 लाख वर्गफीट सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया था। कार्रवाई के दौरान 20 से अधिक पक्की बाउंड्रीवाल, तीन निर्माणाधीन बहुमंजिला मकान, कई कच्चे निर्माण और अन्य अवैध ढांचे ध्वस्त किए थे।

अतिक्रमणकारियों ने आगे बेचे भूखंड

स्थानीय लोगों के अनुसार हवालाखुर्द स्थित यह भूमि इको सेंसिटिव जोन के साथ शहर की सबसे प्राइम लोकेशन में से एक मानी जाती है। गमेती बस्ती के आसपास रह रहे मूल परिवारों की आड़ में पिछले कुछ वर्षों में भू-माफिया ने यहां सरकारी जमीन पर कब्जे शुरू कर दिए। पहले बाउंड्रीवाल खड़ी की, फिर भूखंड काटकर उन्हें बेचा। जानकारी के अनुसार कई लोगों ने 5 हजार से 10 हजार वर्गफीट तक के भूखंडों पर कब्जा कर उन्हें आगे बेच दिया। कुछ कब्जाधारियों ने स्वयं निर्माण करने के बजाय जमीन अन्य लोगों को बेच दी। अब यूडीए की कार्रवाई के बाद कई खरीदार उन दलालों और बिचौलियों की तलाश कर रहे हैं जिन्होंने सरकारी भूमि को निजी बताकर सौदे किए थे।

बिजली कनेक्शन ने खड़े किए सवाल

कार्रवाई के दौरान सामने आया कि अधिकांश अतिक्रमणकारियों के पास बिजली कनेक्शन थे। इसके बाद सवाल उठने लगे कि जब भूमि सरकारी थी तो बिजली कनेक्शन किस आधार पर जारी किए गए। हालांकि विद्युत निगम के नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति निवास के आधार पर आवश्यक दस्तावेज और अनुबंध पत्र प्रस्तुत कर बिजली कनेक्शन प्राप्त कर सकता है। बिजली कनेक्शन किसी भूमि पर स्वामित्व का प्रमाण नहीं माना जाता। यदि संबंधित स्थानीय निकाय आपत्ति दर्ज कराए तो कनेक्शन हटाए भी जा सकते हैं। इसके बावजूद शहर में यह चर्चा जोरों पर है कि बिजली कनेक्शन ने अतिक्रमणकारियों को वैधता का भ्रम दिया, जिसके आधार पर कई लोगों ने भूखंडों की खरीद-फरोख्त तक कर डाली। कार्रवाई के बाद शहर में सबसे अधिक चर्चा कुछ पुलिसकर्मियों या उनके परिजन के नामों को लेकर हो रही है। हालांकि अब तक किसी अधिकारी ने किसी नाम की पुष्टि नहीं की है।

दोबारा कब्जे रोकने की तैयारी

यूडीए अधिकारियों के अनुसार अतिक्रमण मुक्त कराई भूमि को अब प्राधिकरण अपने कब्जे में लेकर चारों ओर बाउंड्रीवाल बनवाएगा, ताकि भविष्य में दोबारा कब्जे नहीं हो सकें। साथ ही भूमि का सीमांकन और रिकॉर्ड सत्यापन भी किया जाएगा।