चौथकाबरवाड़ा उपखंड मुख्यालय को शिवाड़ होते हुए जयपुर मार्ग से जोड़ने वाली डिडायच बनास नदी पर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण का कार्य रविवार को शुरू हो गया है। करीब 101 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस पुलिया के लिए सानिवि ने मशीनरी के साथ मौके पर काम प्रारंभ कर दिया है।
Sawai Madhopur Bridge construction : सवाई माधोपुर। चौथकाबरवाड़ा उपखंड मुख्यालय को शिवाड़ होते हुए जयपुर मार्ग से जोड़ने वाली डिडायच बनास नदी पर उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण का कार्य रविवार को शुरू हो गया है। करीब 101 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस पुलिया के लिए सानिवि ने मशीनरी के साथ मौके पर काम प्रारंभ कर दिया है।
वर्तमान में नदी क्षेत्र में रिवर्स प्वाइंट और आधारभूत संरचना तैयार की जा रही है, ताकि आगामी बारिश के दौरान कार्य प्रभावित न हो। हाल ही में विधायक जितेंद्र गोठवाल ने परियोजना का शिलान्यास किया था । राज्य सरकार की स्वीकृति से बनने वाली इस पुलिया की चौड़ाई लगभग 12.5 मीटर होगी। ग्रामीणों में उत्साह है और वे निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
बरसात के दिनों में डिडायच बनास नदी पर बनी रपट पर पानी आने से चौथ का बरवाड़ा-शिवाड़-जयपुर मार्ग बाधित हो जाता है। इससे लोगों को टोंक होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है । नई पुलिया बनने के बाद यह समस्या समाप्त हो जाएगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार परियोजना को पूरा होने में लगभग दो वर्ष लग सकते हैं, हालांकि प्रयास है कि कार्य निर्धारित समय से पहले पूरा हो । आरएसआरडीसी के कनिष्ठ अभियंता पुखराज मीणा ने बताया कि मानसून को देखते हुए सबसे पहले रिवर्स प्वाइंट का कार्य कराया जा रहा है। ठेकेदार मशीनों के माध्यम से तेजी से कार्य कर रहा है और विभाग नियमित निगरानी कर रहा है ।
उधर, जिले के बरनाला तहसील की ग्राम पंचायत सांचोली की टिगरिया गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। मुख्य गांव से नई आबादी ढाणी तक करीब दो किलोमीटर लंभी पक्की सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ढाणी में 150 से अधिक लोग निवास करते है, लेकिन सड़क निर्माण न होने से उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। रास्ता कई जगहों से बंद हो जाता है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा के समय एंबुलेंस तक नहीं मिल पाती। चालक कच्चे रास्थे का हवाला देकर मुख्य सड़क तक ही आने की बात कहते है, जिससे परिजनों को महिलाओं को पैदल या अन्य साधनों से ले जाना पड़ता है। स्कूली बच्चों को भी रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।