Chhattisgarh News: भारत को पहला निकेल-कॉपर-PGE खनन क्षेत्र मिल सकता है। कंपनी डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड ने दावा किया है कि खनिज पट्टी अब तक 430 मीटर तक प्रमाणित हो चुकी है..
Nickel and Palladium in chhattisgarh: जिस निकेल और पैलेडियम के लिए दुनिया भर में होड़ मची हुई है, उसका बड़ा भंडार अब छत्तीसगढ़ की धरती में मिलने के संकेत मिले हैं। गरियाबंद जिले के भालुकोना क्षेत्र में चल रही ड्रिलिंग में निकेल, तांबा और प्लेटिनम ग्रुप एलिमेंट्स (PGE) का विशाल खनिजीकरण सामने आया है। खोज कर रही कंपनी डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड ने दावा किया है कि खनिज पट्टी अब तक 430 मीटर तक प्रमाणित हो चुकी है, जबकि इसके 1.3 किलोमीटर तक विस्तारित होने के संकेत मिल रहे हैं।
यदि आगे की जांच में भंडार की पुष्टि होती है तो यह भारत का पहला निकेल-कॉपर-PGE खनन क्षेत्र (Nickel-Copper-PGE Mining) बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में निकेल तथा पैलेडियम की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यह खोज भारत की आयात निर्भरता कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
कंपनी ने अब तक 9 ड्रिल होल में करीब 1200 मीटर ड्रिलिंग पूरी की है। ( Chhattisgarh News ) कई स्थानों पर निकेल इक्विवेलेंट (NiEq) ग्रेड आर्थिक रूप से संभावनाशील स्तर पर मिला है। कुछ क्षेत्रों में ग्रेड 1.29 प्रतिशत तक पहुंचा है, जिसे विशेषज्ञ उत्साहजनक मान रहे हैं।
भारत वर्तमान में निकेल, कोबाल्ट और कई महत्वपूर्ण खनिजों के लिए विदेशों पर निर्भर है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत के बीच बने क्वाड समूह ने भी हाल के वर्षों में क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन को रणनीतिक प्राथमिकता दी है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ की यह खोज राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डेक्कन गोल्ड के प्रबंध निदेशक डॉ. हनुमा प्रसाद मोदी के अनुसार कंपनी अब तेजी से अतिरिक्त ड्रिलिंग कर खनन योग्य भंडार की परिभाषा और माइनिंग लीज प्रक्रिया की दिशा में आगे बढ़ेगी।