रायपुर, Jun 02, 2026

1918 का दुर्लभ हस्तलिखित दस्तावेज मिला (photo source- Patrika)
विनोद जैन/1918 School Diary: छत्तीसगढ़ के नवापारा नगर में इतिहास उस समय मानो जीवंत हो उठा, जब वार्ड क्रमांक 09 स्थित सुभाष चौक में एक परिवार के घर से वर्ष 1918 की दुर्लभ हस्तलिखित स्कूल डायरी सामने आई। एक सदी से भी अधिक पुरानी इस डायरी ने न केवल लोगों को हैरान कर दिया, बल्कि क्षेत्र के इतिहास, शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे की झलक भी सामने ला दी। यह ऐतिहासिक दस्तावेज आनंद कुमार श्रीवास्तव के निवास से मिला, जिसे देखकर स्थानीय लोग और इतिहास में रुचि रखने वाले लोग उत्साहित हो उठे। बताया जा रहा है कि डायरी लंबे समय से सुरक्षित रखी गई थी, लेकिन अब पहली बार इसे सार्वजनिक रूप से सामने लाया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल एक पुरानी डायरी नहीं, बल्कि अपने समय की सामाजिक और शैक्षणिक व्यवस्था की जीवंत गवाही है। डायरी में उस दौर के स्कूल संचालन, विद्यार्थियों की गतिविधियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं।
इतिहासकारों का मानना है कि ऐसे दस्तावेज किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्रशासनिक विरासत को समझने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खास बात यह है कि उस समय अधिकांश रिकॉर्ड हाथ से लिखे जाते थे, इसलिए इस तरह के दस्तावेज बेहद दुर्लभ माने जाते हैं।
दुर्लभ डायरी की जानकारी मिलते ही मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) लवकेश पैकरा मौके पर पहुंचे और दस्तावेज का अवलोकन किया। उन्होंने इसे क्षेत्र की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण की दिशा में तत्काल पहल की। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए संचालित ‘ज्ञानभारतम’ पोर्टल पर इस डायरी की ऑनलाइन प्रविष्टि की गई। इससे यह दस्तावेज अब डिजिटल रूप से भी सुरक्षित रहेगा।
एक समय अलमारी और पुराने कागजों के बीच दबा यह दस्तावेज अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संरक्षित किया जा रहा है। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि समय के साथ पुराने दस्तावेज नष्ट होने लगते हैं। डिजिटल संरक्षण के माध्यम से आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक विरासत को देख और समझ सकेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दस्तावेजों का डिजिटलीकरण इतिहास को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा कदम है।
1918 की इस हस्तलिखित डायरी के सामने आने के बाद इतिहास और शिक्षा व्यवस्था पर शोध करने वाले लोगों के लिए नए आयाम खुल सकते हैं। इसमें दर्ज जानकारियां उस दौर की प्रशासनिक कार्यप्रणाली, शिक्षा प्रणाली और सामाजिक ढांचे को समझने में मदद कर सकती हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह खोज नवापारा नगर के गौरवशाली अतीत को सामने लाने वाली बड़ी उपलब्धि है। अब संभावना जताई जा रही है कि क्षेत्र में और भी कई ऐतिहासिक दस्तावेज या विरासत से जुड़े प्रमाण सामने आ सकते हैं।
आज के डिजिटल दौर में जब लोग तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में 100 साल पुरानी यह डायरी लोगों को अपने इतिहास और जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है। नवापारा की यह ऐतिहासिक खोज यह बताती है कि कई बार इतिहास किताबों में नहीं, बल्कि पुराने घरों की अलमारियों और धूल भरे कागजों में छिपा होता है। जरूरत सिर्फ उसे पहचानने और संरक्षित करने की होती है। 1918 की यह दुर्लभ स्कूल डायरी अब केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि नवापारा की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक बन चुकी है।
Updated on: 02 Jun 2026 07:02 pm

कोई कमेंट नहीं है।
पहले कमेंट करने वाले बनें।