Polymenorrhea: क्या आपको भी महीने में दो बार पीरियड्स आ रहे हैं? इसे सिर्फ स्ट्रेस मानकर नजरअंदाज न करें। डॉक्टर से जानें इसके पीछे के छिपे मेडिकल कारण, लक्षण, जरूरी टेस्ट आदि।
Polymenorrhea : महिलाओं की सेहत और उनके शरीर का आंतरिक संतुलन काफी हद तक उनके मेंस्ट्रुअल साइकिल (मासिक धर्म चक्र) पर निर्भर करती है। इसे एक सामान्य और स्वस्थ पीरियड साइकिल को शरीर के सुचारू रूप से काम करने का पैमाना माना जाता है। लेकिन जब इस चक्र में जरा सी भी गड़बड़ी होती है, तो यह पूरे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। ऐसी ही एक बड़ी और चिंताजनक समस्या है एक ही महीने में दो बार पीरियड्स (Two Periods in One Month) का आना।
अक्सर महिलाएं या युवतियां इस स्थिति को महज काम की थकान, सफर या सामान्य तनाव मानकर टाल देती हैं। लेकिन मेडिकल साइंस में इसे पॉलीमेनोरिया (Polymenorrhea) कहा जाता है, जिसे किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। लगातार दो बार ब्लीडिंग होना इस बात का साफ संकेत है कि शरीर के भीतर हार्मोन का खेल बिगड़ चुका है या फिर गर्भाशय (Uterus) कोई गंभीर संकेत दे रहा है।
आइए, डॉ. मेघा .एस. शास्त्री, गायनोलॉजिस्ट से पॉलीमेनोरिया क्या है, इसके पीछे कौन सा मुख्य कारण हैं, शरीर पर इसके क्या दीर्घकालिक नुकसान हो सकते हैं और इसका सही इलाज क्या है; समझते हैं।
एक सामान्य और स्वस्थ महिला का मेंस्ट्रुअल साइकिल औसतन 28 दिनों का होता है। हालांकि, मेडिकल गाइडलाइंस के मुताबिक, अगर पीरियड्स 21 से 35 दिनों के अंतराल पर आ रहे हैं, तो इसे पूरी तरह से सामान्य (Normal) माना जाता है। इस दौरान 3 से 7 दिनों तक ब्लीडिंग हो सकती है। लेकिन, पॉलीमेनोरिया में जब किसी महिला का पीरियड साइकिल 21 दिनों से छोटा हो जाता है, तो उसे एक ही कैलेंडर मंथ (महीने) में दो बार ब्लीडिंग का सामना करना पड़ता है। इसी स्थिति को मेडिकल टर्म में पॉलीमेनोरिया कहते हैं।
शरीर में बिना किसी ठोस वजह के पीरियड साइकिल छोटा नहीं होता। इसके पीछे कई शारीरिक, मानसिक और चिकित्सीय कारण हो सकते हैं जैसे,
सवाल- कई बार महिलाओं को महीने में दो बार सिर्फ 'स्पॉटिंग' (हल्के खून के धब्बे) होती है और कई बार पूरा 'फ्लो' होता है। एक मरीज खुद यह कैसे समझे कि उसे दो बार पीरियड आया है या यह सिर्फ स्पॉटिंग है?
डॉक्टर का जवाब- इसमें अंतर हैं जैसे पीरियड ( Period): इसमें ब्लीडिंग का फ्लो तेज होता है, जिसके लिए हर कुछ घंटों में पैड या टैम्पोन बदलने की जरूरत पड़ती है। इसका रंग गहरा लाल होता है, इसमें खून के थक्के (Clots) आ सकते हैं, यह लगातार 3 से 7 दिनों तक चलता है और इसके साथ पेट या पीठ में तेज ऐंठन (Cramps) होती है।
स्पॉटिंग (Spotting): यह बहुत हल्की ब्लीडिंग होती है, जिसमें सिर्फ अंडरगारमेंट्स पर हल्के गुलाबी या भूरे रंग के धब्बे लगते हैं। इसके लिए पैड बदलने की जरूरत नहीं होती (सिर्फ पैन्टी लाइनर काफी होता है)। यह बिना किसी दर्द के 1-2 दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है।
सवाल-क्या यह समस्या किसी खास उम्र की महिलाओं (जैसे टीनएजर्स या 40 से ऊपर की महिलाओं) में ज्यादा देखी जाती है, या यह किसी भी उम्र में हो सकती है?
डॉक्टर का जवाब -पॉलीमेनोरिया की समस्या वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन यह दो खास उम्र के पड़ावों पर सबसे ज्यादा देखी जाती है।
सवाल- क्या सिर्फ तनाव के कारण एक महीने में दो बार पीरियड्स आ सकते हैं, या इसके पीछे हमेशा कोई गंभीर अंदरूनी बीमारी ही होती है?
डॉक्टर का जवाब - सिर्फ अत्यधिक मानसिक या शारीरिक तनाव (Stress) के कारण भी एक महीने में दो बार पीरियड्स आ सकते हैं। इसके पीछे हमेशा कोई गंभीर बीमारी होना जरूरी नहीं है। तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस को प्रभावित करता है। यह हिस्सा पीरियड्स को नियंत्रित करने वाले एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का संतुलन बिगाड़ देता है, जिससे साइकिल छोटी हो जाती है। हालांकि, अगर ऐसा लगातार हो, तो थायराइड या फाइब्रॉएड जैसी अंदरूनी जांच जरूर करानी चाहिए।
सवाल- जो महिलाएं इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (i-Pill आदि) या रेगुलर बर्थ कंट्रोल पिल्स लेती हैं, उनमें यह समस्या कितनी आम है?
डॉक्टर का जवाब -गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं में महीने में दो बार ब्लीडिंग होना बेहद आम है। विशेषकर इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल (जैसे i-Pill) लेने के 5-7 दिनों के भीतर अचानक हैवी ब्लीडिंग या स्पॉटिंग शुरू हो जाती है (जिसे विड्रॉल ब्लीडिंग कहते हैं), और महिलाएं इसे दूसरा पीरियड समझ लेती हैं। वहीं, रेगुलर बर्थ कंट्रोल पिल्स शुरू करने के शुरुआती 2-3 महीनों में शरीर के हार्मोनल तालमेल बिठाने तक बीच में ब्लीडिंग (ब्रेकथ्रू ब्लीडिंग) होना काफी सामान्य है।
सवाल-ऐसे कौन से लक्षण हैं, जिन्हें देखकर महिला को तुरंत बिना देरी किए डॉक्टर के पास आना चाहिए?
डॉक्टर का जवाब -
सवाल-जब कोई मरीज इस शिकायत के साथ आपके पास आती है, तो समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए आप कौन-से मुख्य टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं?
डॉक्टर का जवाब -
सवाल-पॉलीमेनोरिया के लिए कौन से इलाज मौजूद है?
डॉक्टर का जवाब -पॉलीमेनोरिया का कोई एक तय इलाज नहीं है। इसका ट्रीटमेंट पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि जांच रिपोर्ट में क्या कारण निकलकर आया है।
सवाल-अगर कोई महिला इस समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करती है, तो उसके शरीर पर इसके क्या दीर्घकालिक (Long-term) प्रभाव या कॉम्प्लिकेशन्स हो सकते हैं?
डॉक्टर का जवाब -
सवाल- बार-बार पीरियड्स आने से शरीर में कमजोरी और खून की कमी (Anemia) होना लाजमी है। ऐसे में मरीजों को अपनी डाइट में किन चीजों को खास तौर पर शामिल करना चाहिए?
डॉक्टर का जवाब-