Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर के अस्पताल में लगी आग के बाद रोहिणी आचार्य ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार में डूबे प्रशासन की मिलीभगत से निजी अस्पतालों को नियमों और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने की खुली छूट मिली हुई है।
Muzaffarpur Hospital Fire:बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू (ICU) वार्ड में लगी भीषण आग और उसमें हुई मरीजों की मौत के बाद सूबे की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। इस हादसे को लेकर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सम्राट सरकार और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि बिहार में डबल इंजन सरकार के संरक्षण में जानलेवा अस्पतालों को लोगों की जिंदगी से खेलने की खुली छूट मिली हुई है।
रोहिणी आचार्य ने राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) की का हवाला देते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया और पूछा कि जब सूबे का सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता निजी अस्पतालों में कैसे सुरक्षित रह सकती है?
मुजफ्फरपुर अग्निकांड पर शोक व्यक्त करते हुए रोहिणी आचार्य ने बिहार के हर शहर और कस्बे में खुले निजी नर्सिंग होम्स की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में आग लगने के पश्चात् इलाजरत मरीजों की मौत की घटना दुखद है। बिहार में ऐसे निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम्स की भरमार है, जहां अग्निशमन के उपकरणों व बंदोबस्तों की मौजूदगी बिल्कुल ही नहीं है। सरकारी मानकों और दिशा-निर्देशों का धड़ल्ले से उल्लंघन करते ऐसे अस्पताल व नर्सिंग होम्स प्रदेश में हजारों की संख्या में लगभग हरेक शहर के गली-मुहल्ले में सरकार व प्रशासन की जानकारी में चलाए जा रहे हैं।'
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए राजद नेता ने आरोप लगाया कि अस्पतालों को फायर एनओसी और सुरक्षा मानक पूरे किए बिना चलाने की अनुमति सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार की वजह से मिल रही है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, 'पूरी तरह से भ्रष्टाचार के संक्रमण से ग्रस्त सरकार व प्रशासन की मिलीभगत से ऐसे जानलेवा अस्पतालों को मरीजों की जान जोखिम में डालने की खुली छूट प्राप्त है। ऐसे हादसों के पश्चात् मुआवजे और जांच के आदेश का कोरम पूरा कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है।'
रोहिणी आचार्य ने सरकार के उन दावों की हवा निकाल दी जिसमें स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की बात की जाती है। उन्होंने बिहार के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल पीएमसीएच (PMCH) का उदाहरण देते हुए कहा कि जब सरकारी तंत्र अपने मुख्य ठिकाने को ही सुरक्षित नहीं रख पा रहा, तो निजी क्षेत्रों पर उसका क्या नियंत्रण होगा।
उन्होंने लिखा, 'अस्पतालों में आगलगी को रोकने के लिए सुरक्षा एवं बंदोबस्ती की बदहाली का आलम तो कुछ ऐसा है कि पिछले एक महीने में प्रदेश के सबसे बड़े व प्रतिष्ठित अस्पताल पीएमसीएच (पटना मेडिकल कॉलेज व अस्पताल) में ही आगलगी की लगभग दर्जन भर घटनाएं हो चुकी हैं। जब पीएमसीएच ही सुरक्षित नहीं तो निजी अस्पतालों में मरीज कैसे रहेंगे सेफ?'