Lucknow Land Acquisition: लखनऊ के 332 गांवों में कृषि जमीनों का नया सर्किल रेट आज से लागू होगा। कई क्षेत्रों में दरें दोगुनी हुईं, जिससे किसानों को अधिक मुआवजा और जमीनों की बढ़ी कीमतों का लाभ मिलेगा।
Lucknow Farm Land Rate : राजधानी लखनऊ और उसके ग्रामीण इलाकों में जमीनों की कीमतों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जिले के 332 गांवों में कृषि योग्य जमीनों का नया डीएम सर्किल रेट गुरुवार से प्रभावी हो जाएगा। जिला प्रशासन ने नई दरों को लेकर आई 58 आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद संशोधित दरें लागू करने का फैसला लिया है। नई दरों में कई गांवों में सर्किल रेट को दोगुना तक बढ़ाया गया है, जिससे किसानों और जमीन मालिकों को भविष्य में जमीन अधिग्रहण और बिक्री के दौरान अधिक मुआवजा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
सबसे अधिक आपत्तियां मोहनलालगंज क्षेत्र से प्राप्त हुईं, जहां बड़ी संख्या में किसानों ने प्रशासन से सर्किल रेट और बढ़ाने की मांग की थी। प्रशासन का कहना है कि बढ़ती बाजार कीमतों और प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए नई दरें तय की गई हैं।
जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार जिन गांवों में नई दरें लागू की जा रही हैं उनमें मोहनलालगंज के 161 गांव, सरोजनी नगर के 52 गांव, बीकेटी के 95 गांव, मलिहाबाद के 13 गांव और सदर तहसील के छह गांव शामिल हैं। इन सभी गांवों में कृषि योग्य जमीनों के सर्किल रेट में 100 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। यानी जिन गांवों में पहले प्रति हेक्टेयर जमीन का डीएम सर्किल रेट 20 लाख रुपये था, वहां अब यह बढ़कर 35 से 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। जिला प्रशासन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से बाजार मूल्य और सरकारी सर्किल रेट के बीच बड़ा अंतर बना हुआ था। इसी अंतर को समाप्त करने के लिए संशोधन किया गया है।
नई दरों के लागू होने से खासकर मोहनलालगंज और सरोजनी नगर क्षेत्र के 500 से अधिक किसानों को राहत मिलने की संभावना है। इन क्षेत्रों में भविष्य में होने वाले भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को अब पहले की तुलना में कहीं अधिक मुआवजा मिल सकेगा।
दरअसल, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे को जोड़ने के लिए प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना के चलते इन इलाकों की जमीनों की मांग और कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। कई किसानों का कहना था कि पुराना सर्किल रेट बाजार मूल्य से काफी कम था, जिससे अधिग्रहण की स्थिति में उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता था। नई दरों के बाद किसानों को उम्मीद है कि उनकी जमीनों का वास्तविक मूल्यांकन हो सकेगा।
प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना को नई दरों के पीछे सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। यह एक्सप्रेस-वे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे को जोड़ने के लिए बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए लगभग 48 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जानी है। इनमें सबसे ज्यादा गांव सरोजनीनगर और मलिहाबाद क्षेत्र के हैं। सरोजनी नगर तहसील के अमावां, मवई-पड़ियाना, लोनहा, पिपरसंड, गढ़ी-चुनौटी, राम चैरा, अन्दपुर-देव, औरावां, बंथरा-सिकंदरपुर, कुरौनी, नीवां और हुलास खेड़ा सहित लगभग 33 गांव इस परियोजना में शामिल हैं।
वहीं मलिहाबाद क्षेत्र के हुलासखेड़ा, पहासा, सदरापुर, रतियामऊ, सिठौली कला, देई टीकर, भसंडा, रायपुर, बेन्दौवा, भट्टी बरकत नगर, खुजेहटा, देहरामऊ, गदियाना और डाड़ा सिकंदर जैसे करीब 15 गांव भी प्रस्तावित अधिग्रहण क्षेत्र में शामिल किए गए हैं।
नई प्रस्तावित दरों के अनुसार सरोजनीनगर के बंथरा सिकंदरपुर, बरकताबाद, जहांगीराबाद, हरौनी और कुरौनी जैसे गांवों में जमीनों का सर्किल रेट 80 लाख से लेकर 97 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इन गांवों में एक्सप्रेस-वे और औद्योगिक विकास की संभावनाओं के कारण जमीनों की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों की जमीनें और महंगी हो सकती हैं। रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि राजधानी के आसपास तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में जमीन की कीमतों में पहले ही बड़ा उछाल आ चुका है। ऐसे में डीएम सर्किल रेट का संशोधन जरूरी हो गया था।
जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर ने बताया कि नई दरें तय करने के पीछे दो प्रमुख आधार रहे हैं। पहला, ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार मूल्य और सरकारी सर्किल रेट के बीच भारी अंतर पाया गया। दूसरा, उपजिलाधिकारियों और उपनिबंधकों द्वारा किए गए सर्वे में यह सामने आया कि कृषि भूमि की वास्तविक बाजार कीमतें सरकारी दरों से कहीं अधिक हैं। हालांकि आकृषक और आवासीय जमीनों की बाजार दरें पहले से ही लगभग संतुलित पाई गईं, इसलिए मुख्य रूप से कृषि योग्य जमीनों के सर्किल रेट में संशोधन किया गया है। प्रशासन ने कृषि भूमि को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर नई दरें निर्धारित की हैं। इनमें जनपदीय मार्ग के आसपास की जमीन, संपर्क मार्ग से जुड़ी भूमि, आबादी से सटी भूमि और सामान्य कृषि भूमि शामिल हैं। इसी आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में दरों में वृद्धि की गई है।
एक अगस्त 2025 को भी लखनऊ में नया डीएम सर्किल रेट लागू किया गया था। उस समय शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में कृषि और आवासीय जमीनों के सर्किल रेट में 25 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई थी। लेकिन एलडीए के विस्तारित क्षेत्रों और नगर निगम सीमा के गांवों को छोड़कर शेष ग्रामीण इलाकों में बाजार मूल्य लगातार बढ़ने के कारण एक बार फिर संशोधन की जरूरत महसूस की गई। इस बार विशेष रूप से उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई जहां विकास परियोजनाओं और एक्सप्रेस-वे निर्माण के कारण जमीनों की कीमतों में तेजी से उछाल आया है।
नई दरों को लेकर ग्रामीणों और किसानों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जिन किसानों की जमीनें अधिग्रहण क्षेत्र में आ रही हैं, वे इसे राहत भरा फैसला मान रहे हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें अपनी जमीन का बेहतर मुआवजा मिलेगा।
हालांकि कुछ ग्रामीणों ने चिंता भी जताई है कि सर्किल रेट बढ़ने से जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी। इससे छोटे किसानों और आम खरीदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि नई दरों का असर आने वाले समय में ग्रामीण संपत्तियों के बाजार पर भी दिखाई देगा।
लखनऊ के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र अब तेजी से शहरी स्वरूप में बदल रहे हैं। एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक कॉरिडोर, नई टाउनशिप और बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण इन इलाकों में निवेश बढ़ा है। इसी वजह से जमीनों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है और प्रशासन को भी समय-समय पर सर्किल रेट में संशोधन करना पड़ रहा है।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले वर्षों में मोहनलालगंज, सरोजनी नगर और मलिहाबाद जैसे क्षेत्र राजधानी के नए विकास केंद्र बन सकते हैं। ऐसे में जमीनों की कीमतों में और तेजी आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नई सर्किल दरों के लागू होने के बाद अब जिले के ग्रामीण इलाकों में जमीनों की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री और अधिग्रहण प्रक्रियाओं पर सीधा असर दिखाई देगा। साथ ही यह फैसला राजधानी के बदलते भूगोल और विकास की नई दिशा को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है।