5 जून 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लखनऊ, Jun 05, 2026

जब उग्र लोगों की भीड़ में फंस गए थे अमित शाह, योगी आदित्य नाथ के ‘सैनिकों’ ने बचाया

बात 2014 के लोक सभा चुनाव से पहले की है। अमित शाह उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव थे। इस नाते लगातार राज्य का दौरा किया करते थे।

cm yogi delhi meeting cabinet reshuffle up

दिल्ली में अमित शाह के साथ योगी आदित्यनाथ (दाएं)। File Photo

पांच जून, 1972 को जन्मे योगी आदित्य नाथ बतौर मुख्यमंत्री दूसरे कार्यकाल के आखिरी साल में हैं। तीसरी बार भी सत्ता में आएं, इसके लिए सक्रिय हो चुके हैं। 2017 में भाजपा ने जब उन्हें पहली बार मुख्यमंत्री बनाया था तब प्रशासनिक अनुभव के नाम पर उनके पास कुछ खास नहीं था। तब गोरखनाथ मठ का महंत बने भी उन्हें ज्यादा दिन नहीं हुए थे। लेकिन पांच साल सीएम रह कर, दोबारा चुनाव जीत कर सीएम बनने के बाद उन्होंने सारी शंका खत्म कर दी।

2017 के चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत के बाद योगी को सीएम चुने जाने में अमित शाह की बड़ी भूमिका रही थी। आज कई लोग योगी को अमित शाह का प्रतिद्वंदी और नरेंद्र मोदी का उत्तराधिकारी तक मानने लगे हैं, लेकिन शाह और योगी का समीकरण पुराना है। योगी ने शाह को शुरुआत में ही अपनी संगठन क्षमता और इलाके में मजबूत पकड़ का नमूना दिखा दिया था।

2014 के लोक सभा चुनाव से पहले अमित शाह को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। इस नाते शाह ने बड़े पैमाने पर राज्य का दौरा किया था। इसी क्रम में वह कई बार गोरखपुर भी पहुंचे थे और योगी से मिलते रहते थे। एक बार वहां उन्हें स्थानीय लोगों के उग्र विरोध का सामना करना पड़ा। तब उन्होंने योगी आदित्य नाथ से संपर्क किया। योगी की हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता तुरंत बड़ी संख्या में पहुंच गए। उन्होंने रास्ता खाली करवाया। तब अमित शाह सुरक्षित अपना दौरा जारी रख सके।

मुख्यमंत्री बनने से पहले पांच बार गोरखपुर से सांसद रह चुके आदित्य नाथ 1994 में ही महंत अवैद्यनाथ के शिष्य बन चुके थे। जब वह सीएम बने तब भी उनकी दिनचर्या तड़के तीन बजे से ही शुरू हो जाती थी। मठ में रहे तो जग कर योग आदि करने के बाद पालतू जानवरों को खाना खिलाना उनका रोज का काम था। कुत्ता, बिल्ली, हिरण, बंदर सब उनके पालतू थे। कल्लू नाम का कुत्ता तो उनका सबसे प्यारा जानवर हुआ करता था। खाली वक्त में वह कल्लू के साथ खेला करते थे।

गोरखनाथ मंदिर के पास ही गौशाला थी। उसमें 500 गायें हुआ करती थीं। उन गायों और तालाब में मछलियों को खाना खिलाने के बाद ही योगी आदित्य नाथ नाश्ता किया करते थे।

राजनीति में आदित्य नाथ ने शुरू से ही 'फायर ब्रांड' नेता की छवि बनाई। 2005 में उन्होंने 5000 ईसाइयों को हिन्दू बनाने में अहम भूमिका निभाई। दो साल बाद कर्फ़्यू तोड़ने और शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए। वह लगातार भड़काऊ भाषण देने के लिए चर्चा में रहे। बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की तुलना पाकिस्तानी आतंकी हाफ़िज़ सईद से कर दी।

मोहर्रम के जुलूस में फायरिंग में एक हिन्दू लड़के की मौत के बाद 27 जनवरी, 2007 को गोरखपुर में एक सभा में उन्होंने कहा था, 'एक हिंदू के खून के बदले आने वाले समय में हम प्रशासन से एफ़आईआर नहीं करवाएंगे, बल्कि कम से कम दस ऐसे लोगों की हत्या उससे करवाएंगे।'

भाषण खत्म भी नहीं हुआ था कि पास में ही एक मुस्लिम का होटल लूट लिया गया। दंगे भड़क गए। कम से कम दो लोगों की जान गई और करोड़ों की संपत्ति जला गी गई। अगले दिन आदित्य नाथ ने डीएम द्वारा लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करके अपने समर्थकों के साथ मार्च निकालने की कोशिश की। उन्हें उनकी हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्यों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।

शुरू से राजनीति के एंग्री मैन

आदित्य नाथ शुरू से ही उग्र विचार के थे। 1990 के दशक में गोरखपुर में कॉलेज के कुछ छात्रों की एक कपड़ा व्यापारी से झड़प हो गई। व्यापारी ने रिवॉल्वर निकाल ली। अगले दिन आदित्य नाथ ने बड़ी रैली निकाली और एसपी के बंगले का घेराव कर लिया।

उन दिनों पूर्वाञ्चल की राजनीति पर हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र प्रताप शाही जैसे बाहुबली नेताओं का दबदबा था। आदित्य नाथ गोरखनाथ मठ से नए-नए जुड़े थे। छात्रों के समर्थन में एसपी के बंगले का घेराव कर वे उनके हीरो बन गए। लोगों को महंत दिग्विजय नाथ याद आने लगे, जिन्होंने 1921 के चौरी चौरा कांड में अहम भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि जिस भीड़ ने चौरी चौरा में थाने में आग लगाई थी, उसका नेतृत्व महंत दिग्विजय नाथ ने ही किया था। इस कांड के विरोध में ही महात्मा गांधी ने अपना असहयोग आंदोलन खत्म करने की घोषणा की थी।

कमेंट्स

कोई कमेंट नहीं है।

पहले कमेंट करने वाले बनें।

कृपया पक्का करें कि आपका कमेंट हमारे नियमों एवं शर्तों के मुताबिक हो।
ट्रेंडिंग वीडियो

संबंधित खबरें