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अलवर, Jun 01, 2026

Fake Recruitment: फर्जी भर्ती मामले में अलवर पुलिस सुस्त, गृह सचिव ने DGP को लिखा पत्र

राजस्थान में फर्जी भर्तियों पर जहां एक तरफ सरकार ताबड़तोड़ एक्शन ले रही है, वहीं अलवर पुलिस इस मामले में ठंडी पड़ी है। सालों पहले केस दर्ज होने के बाद भी अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की इस सुस्ती पर अब गृह सचिव कार्यालय ने नाराजगी जताते हुए सीधे डीजीपी (DGP) को चिट्ठी लिख दी है।

fake recruitment case

representative picture (AI)

राजस्थान सरकार इन दिनों सरकारी नौकरियों में हुए फर्जीवाड़े को लेकर सख्त है। एक के बाद एक कड़े फैसले लिए जा रहे हैं और दोषियों को जेल भेजा जा रहा है। लेकिन अलवर जिले से जो तस्वीर सामने आ रही है, वह हैरान करने वाली है। जिला परिषद की फर्जी भर्तियों को लेकर दर्ज मुकदमों पर अलवर पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब गृह सचिव कार्यालय को खुद इस मामले में दखल देना पड़ा है। गृह सचिव कार्यालय के शासन उप सचिव एलआर मीणा ने डीजीपी को पत्र लिखकर इस पूरे मामले में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

तीन साल में बदल गए तीन थानेदार, कार्रवाई जीरो

इस पूरे फर्जीवाड़े का खेल तब खुला था जब स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जांच में जिला परिषद की भर्तियों में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी थी। इसके बाद एसओजी की तरफ से 4 अगस्त 2023 को अलवर के अरावली विहार थाने में पहला मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस केस में दो सरकारी शिक्षक, एक बाबू (लिपिक) और एक अज्ञात व्यक्ति समेत चार लोगों को आरोपी बनाया गया था।

हैरानी की बात यह है कि पिछले तीन सालों में इस थाने में तीन थानाधिकारी (एसएचओ) बदल चुके हैं, लेकिन तफ्तीश आगे नहीं बढ़ी। पुलिस की इस टालमटोल नीति से परेशान होकर शिकायतकर्ता को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जब कोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा, तो पुलिस ने सारा ठीकरा जिला परिषद पर फोड़ते हुए कह दिया कि विभाग यह नहीं बता पा रहा है कि भर्ती का सत्यापन करने वाली टीम के अधिकारी अभी कहां तैनात हैं।

दूसरे जिलों की पुलिस आगे, अलवर पुलिस पीछे

अलवर पुलिस की सुस्ती का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसी फर्जीवाड़े से जुड़े दूसरे मामलों में जयपुर और दौसा पुलिस आगे है। नवंबर 2025 में जिला परिषद के सीईओ ने दो महिला बाबुओं के खिलाफ अरावली विहार थाने में ही दूसरा केस दर्ज कराया था, जिस पर आज तक कोई नतीजा नहीं निकला।

वहीं दूसरी तरफ, जयपुर की बनीपार्क थाना पुलिस ने अलवर जिला परिषद से जुड़े एक अन्य मामले में फुर्ती दिखाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और बाकी कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए तलब कर लिया। इसके अलावा दौसा पुलिस भी अपने हिस्से के मामलों में तेजी से जांच आगे बढ़ा रही है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर अलवर पुलिस किसके दबाव में इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है? गृह सचिव के पत्र के बाद अब पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है।

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