
Itikaf Guidelines
Itikaf Guidelines Issued in Qatar: कतर ने मुस्लिमों के पवित्र माह रमजान-2026 (Ramadan) के लिए ऐतिकाफ के नियम जारी कर दिए हैं। नियमों के तहत मस्जिदों में ऐतिकाफ केवल पुरुषों के लिए होता है। ऐतिकाफ में 18 वर्ष से अधिक उम्र के पुरूषों को ही शामिल होने की अनुमति है। ऐतिकाफ में 8 से 18 वर्ष तक के युवा भी अपने अभिभावक के साथ शामिल हो सकते हैं। ऐतिकाफ के शामिल लोगों को पूरी तरह से इबादत पर ध्यान केंद्रित करना होगा और अनुचित गतिविधियों से बचना होगा। बता दें कि कतर में मस्जिद आधारित ऐतिकाफ में भागीदारी पवित्र महीने के दौरान केवल पुरुषों ही शामिल हो सकते हैं। कतर के अधिकारियों के अनुसार, ये नियम मस्जिदों के अंदर स्थान प्रबंधन और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। ऐतिकाफ के समय बड़ी संख्या में उपासक देर रात की नमाज और आध्यात्मिक चिंतन के लिए एकत्रित होते हैं।
कतर में मस्जिद के शिष्टाचार मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों में बताया गया कि ध्यान साधना के दौरान प्रतिभागियों को मस्जिदों के अंदर कैसा व्यवहार करना चाहिए। निर्देशों में कहा गया है कि उपासकों को सोने और खाने के लिए निर्धारित स्थानों का उपयोग करना होगा। इसके साथ ही लोगों से आग्रह किया गया कि वे मस्जिद परिसर में व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें और मस्जिद की संपत्ति और सुविधाओं का सम्मान करें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे ऐसे कार्यों से बचें, जिनसे आध्यात्मिक वातावरण में बाधा उत्पन्न हो सकती है। मस्जिदों की सुंदरता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए, नमाजियों को दीवारों, स्तंभों या फर्नीचर पर कपड़े न टांगने और मस्जिद प्रबंधन टीमों द्वारा जारी सभी निर्देशों का पालन करने का भी निर्देश दिया जाता है।
ऐतिकाफ एक तरह की उपासना है। यह उपासना मुस्लिमों के पवित्र माह रमजान के अंतिम के अंतिम 10 दिनों में की जाती है। कतर के अधिकारियों के अनुसार, रमजान के दौरान मस्जिद में किए जाने वाले पारंपरिक एकांतवास को ऐतिकाफ कहा जाता है। इस एकांतवास में प्रतिभाग करने वाले मुसलमानों के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालु पवित्र महीने के आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण अंतिम दिनों में मस्जिदों के अंदर व्यवस्था, स्वच्छता और सम्मान बनाए रखते हुए प्रार्थना में लीन हो सकें। यह दिशा निर्देश कतर के धार्मिक मामलों और मस्जिद प्रशासन की देखरेख करने वाले धर्मार्थ और इस्लामी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हैं।
ऐतिकाफ सदियों पुरानी इस्लामी प्रथा है। ऐतिकाफ में शामिल होने वाला उपासक रमजान के अंतिम 10 दिनों में कई दिन मस्जिद में बिताता है और पूरी तरह से प्रार्थना, कुरान का पाठ और खुदा की इबादत करता है। ऐतिकाफ में रोजेदार मस्जिद के अलग कोने में रहने की व्यवस्था करते हैं और शांति का पूरी तरह से ध्यान रखते हैं। इस दौरान रोजेदार बाहरी दुनिया से दूर रहते हैं और सिर्फ जरूरी बातचीत ही करते हैं। इस दौरान व्यापार करना, लड़ाई-झगड़ा करना या अनावश्यक बात करना मना है। मान्यताओं के अनुसार, हर मुसलमान को रमजान के आखिरी 10 दिनों में ऐतिकाफ करना चाहिए।
Published on:
07 Mar 2026 06:30 pm
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