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Epstein Files: ‘प्लीज! हमारी पहचान उजागर मत करो’, 100 महिलाओं की दर्दनाक अपील से हिला अमेरिका

DOJ Data Leak: अमेरिकी न्याय विभाग की गलती से एपस्टीन केस की 100 पीड़ित महिलाओं की पहचान लीक हो गई। वकील ब्रिटनी हेंडरसन की अपील पर प्रशासन ने दस्तावेज वेबसाइट से हटाए।

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भारत

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MI Zahir

Feb 04, 2026

Epstein Files ladies

एपस्टीन फाइल्स में महिलाओं की पहचान उजागर होने का विरोध। प्रतीकात्मक (फोटो: AI Genrated )

Brittany Henderson: जेफरी एपस्टीन के काले कारनामों की फाइलें खुलने का सिलसिला जारी है, लेकिन इस बार मामला खुलासे से ज्यादा 'बड़ी लापरवाही' का बन गया है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा जारी की गई नई Epstein Files ने करीब 100 पीड़ित महिलाओं (Survivors) की रातों की नींद उड़ा दी है। इन महिलाओं ने एक सुर में प्रशासन से गुहार लगाई है- "कृपया, हमारी पहचान उजागर मत करो।" यह मांग मुख्य रूप से अटॉर्नी ब्रिटनी हेंडरसन (Brittany Henderson) ने उठाई है। वह लॉ फर्म (Edwards Henderson Lehrman0 की पार्टनर हैं और इस मामले में कई पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। यह घटनाक्रम 2 और 3 फरवरी 2026 (अमेरिकी समयानुसार) का है। वकीलों ने न्यूयॉर्क (New York) के संघीय न्यायाधीशों (Federal Judges) और अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice) के समक्ष यह आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि न्याय विभाग द्वारा जारी की गई फाइलों में 'खराब रेडैक्शन' (गलत एडिटिंग) की वजह से पीड़ितों के नाम, फोन नंबर और तस्वीरें लीक हो गई हैं। उन्होंने इसे "आपातकाल" बताते हुए फाइलों को तुरंत हटाने की मांग की।

एपस्टीन केस : क्या है पूरा मामला ?

हाल ही में न्याय विभाग ने पारदर्शिता के नाम पर एपस्टीन केस से जुड़े हजारों दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। मकसद था सच को सामने लाना, लेकिन इस प्रक्रिया में अधिकारियों से भारी चूक हो गई। आरोप है कि दस्तावेजों को पब्लिक करने से पहले ठीक से 'एडिट' या 'रेडैक्ट' (Redact) नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि कई पीड़ित महिलाओं के असली नाम, उनके मेडिकल रिकॉर्ड, घर के पते, फोन नंबर और यहां तक कि उनकी बेहद निजी तस्वीरें भी दुनिया के सामने आ गईं।

पीड़ितों का दर्द और वकीलों का एक्शन

इस लापरवाही के सामने आते ही हड़कंप मच गया। लगभग 100 पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों ने तुरंत अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना है कि यह केवल निजता का हनन नहीं है, बल्कि उन महिलाओं को दोबारा उसी मानसिक आघात (Trauma) में धकेलने जैसा है, जिससे वे बड़ी मुश्किल से बाहर निकली थीं। वकीलों ने इसे "जानलेवा लापरवाही" करार देते हुए मांग की है कि जब तक हर एक दस्तावेज से पीड़ितों की पहचान पूरी तरह मिटा नहीं दी जाती, तब तक फाइलों को वेबसाइट से हटा लिया जाए।

पीड़ितों के कानूनी समूह ने कहा, हमें बदले में डर मिला

इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पीड़ितों के कानूनी समूह ने कहा, "हमने न्याय की उम्मीद की थी, लेकिन हमें बदले में डर मिला।" अटॉर्नी ब्रिटनी हेंडरसन, जो कई पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, ने कहा कि यह "खराब रेडैक्शन" (Sloppy redactions) अक्षम्य है। उन्होंने बताया कि कई महिलाओं को अब डर है कि उनकी पहचान उजागर होने से उन्हें समाज में शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी और उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अमेरिकी न्याय विभाग की इस गलती की कड़ी आलोचना की है।

विवादित दस्तावेज वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया शुरू

वकीलों के भारी दबाव और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) बैकफुट पर आ गया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, विभाग ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए विवादित दस्तावेज वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा है कि वे अब हर पेज की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि भविष्य में किसी भी 'सर्वाइवर' की पहचान लीक न हो। हालांकि, वकीलों का कहना है कि जो जानकारी इंटरनेट पर आ चुकी है, उसे पूरी तरह मिटाना अब मुश्किल होगा।

आधुनिक तकनीकों का सही इस्तेमाल न होना ऐसी गलतियों का कारण

इस घटना ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है— 'पारदर्शिता बनाम सुरक्षा'। क्या जनता को सब कुछ जानने का अधिकार है, भले ही इसकी कीमत किसी पीड़ित की सुरक्षा हो? विशेषज्ञ मान रहे हैं कि हाई-प्रोफाइल मामलों में डिजिटल दस्तावेजों को जारी करते समय एआई (AI) और आधुनिक तकनीकों का सही इस्तेमाल न होना ऐसी गलतियों का कारण बन रहा है। यह मामला भविष्य के सभी संवेदनशील केसों के लिए एक सबक बन गया है कि डेटा रिलीज करने से पहले 'ह्यूमन रिव्यू' कितना जरूरी है।