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‘ऑपरेशन हेरोफ’ से पाक सेना को बड़ा झटका, 280 जवान मारे गए, भारतीय अधिकारी बोले- कभी सोचा नहीं होगा कि…

'ऑपरेशन हेरोफ' के दूसरे चरण में 280 पाकिस्तानी जवानों के मारे जाने का दावा किया गया है। पाकिस्तानी बल तेजी से पीछे हट रहे हैं।

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भारत

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Mukul Kumar

Feb 04, 2026

पाक सेना। (फोटो- IANS)

बलूचिस्तान की घटनाओं से पाकिस्तान सरकार शर्मिंदा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दावा किया है कि उसने 'ऑपरेशन हेरोफ' के दूसरे चरण में 280 पाकिस्तानी जवानों को मार गिराया है।

बलूचिस्तान से मिली खबरों के मुताबिक, कई पाकिस्तानी जवान तेजी से पीछे हट रहे हैं क्योंकि वे बीएलए का सामना नहीं कर पा रहे हैं।

इस बीच, बीएलए ने भी दावा किया है कि उसके 35 लड़ाके मारे गए हैं। इनमें मजीद ब्रिगेड के 18 आत्मघाती हमलावर शामिल हैं।

60 सालों से लड़ाई लड़ रहे बलूच लोग

उधर, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार और बलूच लोग लगभग 60 सालों से लड़ाई लड़ रहे हैं। हालांकि, यह सबसे भीषण लड़ाई है और पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को ऐसे नुकसान होने वाले हैं, जिनकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को इस समस्या का राजनीतिक समाधान खोजना चाहिए था। उसने इसके बजाय हिंसा का रास्ता चुना और अब इसकी कीमत चुका रहा है।

भारतीय अधिकारियों ने क्या कहा?

भारतीय अधिकारी ने आगे कहा कि सेना के बड़े अधिकारी इतने अहंकारी हैं कि वे बलूच नेताओं के साथ बैठकर बातचीत नहीं करना चाहते। उन्होंने खुद को ऐसी स्थिति में डाल लिया है जिससे वे फिलहाल बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

दूसरी ओर, बीएलए जैसे समूह मजबूत हुए हैं। वे दुश्मन से लड़ने के लिए आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं और खुफिया जानकारी पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। नेतृत्व में युवा लोग हैं और हाल के दिनों में महिलाएं भी इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

पीछे हट रहे जवान

विशेषज्ञ ने कहा कि यह तथ्य कि कई पाकिस्तानी जवान पीछे हट रहे हैं, यह सिर्फ बीएलए की ताकत और बलूच लोगों के संकल्प को दिखाता है। कई लोग इस लड़ाई में दिलचस्पी नहीं रखते क्योंकि वे जानते हैं कि वे हारने वाली लड़ाई लड़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ लड़ाई में भी यही हाल है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के एक आकलन के अनुसार, पाकिस्तान सरकार हर तरफ से घिरी हुई है। अफगानिस्तान में तालिबान हैं, पाकिस्तान में ही टीटीपी और बलूच हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा बल एक साथ इन तीनों समूहों से लड़ रहे हैं और इसलिए पर्याप्त मैनपावर तैनात करना मुश्किल हो रहा है। एक इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी ने कहा कि वह एक मोर्चे पर मैनपावर कम करके दूसरे मोर्चे पर भेजने की स्थिति में नहीं है।

युद्ध के मैदान में पांच अलग-अलग यूनिट

विशेषज्ञ ने आगे कहा कि ताजा लड़ाई के दौरान बीएलए ने पाक सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी), पुलिस, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीसी) और सेना समर्थित डेथ स्क्वॉड के सदस्यों को मारने में कामयाबी हासिल की है।

अधिकारियों ने कहा कि यह अपने आप में चिंताजनक है क्योंकि युद्ध के मैदान में पांच अलग-अलग यूनिट हैं और फिर भी वे एक अकेले ग्रुप का सामना नहीं कर पा रहे हैं।