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खौफनाक: 22 साल की अफगान महिला पर बरसेंगे मौत के पत्थर, इस एक ‘गलती’ के लिए तालिबान बना हैवान

Khadija Ahmadzada Taliban case: अफगानिस्तान में एक महिला को पत्थर मार-मारकर मौत के घाट उतारा जा सकता है। मानवाधिकार कार्यकर्ता उसे बचाने की कोशिशों में लगे हैं।

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Khadija Ahmadzada Taliban case

महिला को मौत की सजा सुनाई गई है। (PC:AI)

Afghan woman death sentence: अफगानिस्तान का क्रूर चेहरा फिर एक बार सामने आया है। यहां एक 22 साल की महिला को पत्थर मार-मार कर मौत के घाट उतारा जा सकता है। महिला का कसूर सिर्फ इतना है कि उसने लड़कियों को चुपके से ताइक्वांडो सिखाया है। खदीजा अहमदजादा (Khadija Ahmadzada) को 10 जनवरी को तालिबान द्वारा बनाए नियमों का उल्लंघन करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। तालिबान राज में महिलाओं को किसी भी तरह के स्पोर्ट्स में शामिल होने की मनाही है। ऐसे में खदीजा अहमदजादा का 'गुनाह' बेहद गंभीर बन गया है।

घर में सिखाया था मार्शल आर्ट

एक्टिविस्ट्स को डर है कि तालिबान शासक खदीजा अहमदजादा को मौत के घाट उतार सकता है और इसके लिए पुराना प्रचलित तरीका इस्तेमाल किया जा सकता है। मेट्रो यूके की रिपोर्ट के अनुसार, खदीजा अपने घर के आंगन में चुपके से लड़कियों को ताइक्वांडो सिखा रही थी, जो तालिबान के नियमों के खिलाफ है। तालिबान ने उसे 10 जनवरी को Herat क्षेत्र से गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी के बाद एक्टिविस्ट्स को डर है कि उसे पत्थर मारकर मौत के घाट उतारा जा सकता है, जो सजा देने का तालिबान का एक प्रचलित तरीका है।

अदालत ने सुनाई मौत की सजा

खदीजा अहमदजादा को बचाने के लिए मानवाधिकार कार्यकर्ता हरकत में आ गए हैं। ब्रिटिश-अफगान कार्यकर्ता शबनम नसिमी (British-Afghan activist Shabnam Nasimi ) ने कहा कि खदीजा महिला होने को अपराध नहीं समझती और यही तालिबान की नजर में उनकी सबसे बड़ी गलती है। तालिबान की पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा और गिरफ्तार करके ले गई। खबर यह भी है कि अदालत ने उसे लड़कियों को मार्शल आर्ट सिखाने के लिए पहले ही मौत की सजा सुना दी है। खदीजा को कभी भी पत्थर मारकर मौत के घाट उतारा जा सकता है।

महिला को बचाने की कोशिशें शुरू

शबनम नसीमी के अनुसार, पता चला है कि अहमदजादा और उनके पिता को घर से घसीटकर बाहर निकाला गया और एक सप्ताह से अधिक समय से हिरासत में रखा गया। खदीजा अहमदजादा का परिवार से अब कोई संपर्क नहीं है। कोई नहीं जानता कि वह इस वक्त कहा हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि खदीजा को बचाने के लिए ऑनलाइन अभियान चलाएं, ताकि दुनिया का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ऐसे मामलों पर प्रतिक्रिया देता है, तो तालिबान क्रूरता करने में हिचकता है।

महिलाओं की जिंदगी नर्क

2021 में तालिबान के देश पर कब्जा करने के बाद से महिलाओं और लड़कियों की आजादी खत्म हो गई है। उन्हें तमाम तरह की बंदिशों में रहना पड़ रहा है। लड़कियों को स्कूल से निकाल दिया गया है, उन्हें पब्लिक में हर समय अपना चेहरा और शरीर ढकने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्हें ऐसे पुरुषों को देखने की इजाज़त नहीं है, जिनसे उनका कोई रिश्ता या शादी नहीं हुई है। महिलाओं के गाने सुनने पर भी पाबंदी है। सड़कों रहने को मजबूर महिला भिखारियों ने पूर्व में बताया था कि तालिबानी लड़ाकों ने उनका रेप किया, पीटा और जबरदस्ती मजदूरी करवाई। पिछले साल जुलाई में एक UN रिपोर्ट में कहा गया था कि 'नेकी फैलाने और बुराई रोकने' वाला अफगानी मंत्रालय महिलाओं और लड़कियों के बीच डर और धमकी का माहौल बना रहा है। 2022 में, यूनिसेफ की कार्यकर्ता सैम मॉर्ट ने महिलाओं और लड़कियों पर हो रहे ज़ुल्म को 'दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट' बताया था।