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जेल में पूर्व पीएम इमरान खान की हालत देखकर सन्न रह गए सुप्रीम कोर्ट के जज, अहम फैसला सुनाया तो उठ गई बड़ी मांग

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के एडिटोरियल में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में पेश एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट इमरान खान की जेल स्थितियों पर सरकार की कड़ी निंदा है।

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भारत

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Mukul Kumar

Feb 14, 2026

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान। (फोटो- ANI)

पाकिस्तान के एक बड़े अखबार ने दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के जेल में रहने के हालात पर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट सरकार पर कड़ी फटकार है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के एक एडिटोरियल में कहा गया- इससे साफ पता चलता है कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री को जेल मैनुअल के तहत कानूनी सुविधाएं नहीं दी गईं और उनकी सेहत का ध्यान नहीं रखा गया।

एडिटोरियल में क्या कहा गया?

एडिटोरियल में कहा गया- इस क्रिमिनल लापरवाही की वजह से इमरान की दाहिनी आंख में गंभीर इंफेक्शन हो गया, जिससे अब उनकी नज़र 15 परसेंट से भी कम बची है।

अखबार के मुताबिक, सलमान सफदर को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने खान से मिलने और जेल के दौरान उनके साथ कैसा बर्ताव हो रहा है, इस पर रिपोर्ट करने का काम सौंपा है।

चीफ जस्टिस को सलमान ने क्या बताया?

सलमान ने चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी की दो मेंबर वाली बेंच को बताया कि अक्टूबर 2025 तक, खान की नजर 6x6 थी, लेकिन बाद में यह धुंधली होने लगी।

अब यह भी सूचना है कि जेल सुपरिटेंडेंट ने कोर्स करेक्शन की सभी रिक्वेस्ट को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें एक क्वालिफाइड ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट से मिलना भी शामिल था।

नियम के हिसाब से नहीं चली सरकार

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के एडिटोरियल में कहा गया- सरकार अब खुद कठघरे में है क्योंकि वह नियम के हिसाब से नहीं चली और हाई-प्रोफाइल कैदी को जाहिर तौर पर तकलीफ झेलनी पड़ी।

इसको देखते हुए जज ने ऑर्डर जारी किए हैं कि खान को पर्सनल डॉक्टरों से मिलने और विदेश में रहने वाले अपने बेटों से टेलीफोन पर कॉन्टैक्ट करने की इजाजत दी जाए।

16 फरवरी तक आदेश पालन करने का निर्देश

कोर्ट ने 16 फरवरी तक अपने ऑर्डर का पालन करने को कहा है। आदेश में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के चीफ के डेली रूटीन की छोटी-छोटी बातें, उनका मेन्यू और जेल में उन्हें मिलने वाली खराब सुविधाएं, उन लोगों से तुलना करने लायक हैं जिनके साथ सलाखों के पीछे पहले बर्ताव किया जाता था।

दोषी अधिकारियों पर एक्शन लेने की मांग

अखबार ने कहा- इस स्थिति में जेल अधिकारियों और जेल में बैठे लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिनकी आपराधिक लापरवाही की वजह से पूर्व चीफ एग्जीक्यूटिव की आंखों की रोशनी जा रही है। अब समय आ गया है कि सुधार किया जाए और जेल में बंद राजनीतिक कैदियों के साथ व्यवहार में न्याय और निष्पक्ष व्यवहार को अहमियत दी जाए।

इमरान को बेल पर रिहा करने का आग्रह

इस बीच, अखबार ने शनिवार को बताया कि इस्लामाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें तोशखाना-II मामले में इमरान खान की सजा को सस्पेंड करने और मेडिकल आधार पर उन्हें बेल पर रिहा करने की मांग की गई है।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया- यह पिटीशन शनिवार को बैरिस्टर सलमान सफदर और खालिद यूसुफ चौधरी के जरिए फाइल की गई थी। 190 मिलियन यूरो के इस केस में सजा के सस्पेंशन से जुड़े केस की जल्द सुनवाई के लिए एक मिसलेनियस एप्लीकेशन भी फाइल की गई है।