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Bangladesh Election: बांग्लादेश चुनाव में कहां हुई गड़बड़ी? दूसरे देश से निगरानी करने पहुंचे नेता ने बताई पूरी सच्चाई

बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव (12 फरवरी 2026) में तारिक रहमान की अगुवाई वाली बीएनपी ने भारी बहुमत हासिल किया। यूरोपीय यूनियन इलेक्शन ऑब्जर्वेशन मिशन (ईयू ईओएम) ने 14 फरवरी को इसे भरोसेमंद, प्रतिस्पर्धी और कुशलतापूर्वक प्रबंधित बताया।

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भारत

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Mukul Kumar

Feb 14, 2026

बांग्लादेश के पीएम बन सकते हैं तारिक रहमान। (फोटो- IANS)

बांग्लादेश में पार्लियामेंट चुनाव खत्म हो चुका है। इसमें तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बांग्लादेश चुनाव में कोई गड़बड़ी हुई है? तो इसका जवाब भी सामने आ गया है।

चुनाव की निगरानी करने के लिए दूसरे देश से बांग्लादेश पहंचे ऑब्जर्वरों ने पूरी सच्चाई बताई है। यूरोपीय यूनियन इलेक्शन ऑब्जर्वेशन मिशन (ईयू ईओएम) ने गुरुवार को हुए बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव को भरोसेमंद और अच्छे से प्रबंधित बताया है।

चुनाव में क्या रही खास बात?

ईयू ईओएम ने इसे लोकतांत्रिक गवर्नेंस और कानून का राज वापस लाने की दिशा में एक जरूरी कदम बताया है। यूरोपियन पार्लियामेंट (एमईपी) के सदस्य और मिशन के चीफ ऑब्जर्वर इवार्स इजाब्स ने ढाका में एक प्रेस ब्रीफिंग में चुनाव को लेकर यह बयान जारी किया है।

टॉमस जेडचोव्स्की के नेतृत्व में एमईपीएस के प्रतिनिधिमंडल ने नतीजों का समर्थन किया। इजाब्स ने कहा- 2026 का संसदीय चुनाव सच में प्रतिस्पर्धा से भरा था, जिसमें फंडामेंटल फ्रीडम का काफी हद तक सम्मान किया गया।

चुनाव का कानूनी फ्रेमवर्क कैसे रहे?

इजाब्स ने आगे कहा- चुनाव का कानूनी फ्रेमवर्क काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड्स के हिसाब से है, जबकि बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन ने स्वतंत्रता और पारदर्शिता से काम किया।

यूरोपियन नेता ने पारदर्शिता बढ़ाने और वोटरों को सोच-समझकर चुनाव करने में मदद करने में सिटिजन ऑब्जर्वर, फैक्ट-चेकर्स और युवा और महिला कार्यकर्ताओं के योगदान का भी जिक्र किया।

चुनाव में क्या रही बड़ी कमी?

वहीं, मिशन ने चुनाव की कमियों को भी बताया, जिसमें दिव्यांग लोगों की कम भागीदारी, महिलाओं के लिए कम राजनीतिक जगह, कभी-कभी स्थानीय राजनीतिक हिंसा और गलत जानकारी की वजह से होने वाले भीड़ के हमलों का लगातार डर शामिल है।

ऑब्जर्वर ने कहा कि सकारात्मक एक्शन के उपायों की कमी के कारण आदिवासी समुदायों और अल्पसंख्यकों का भी राजनीति में कम प्रतिनिधित्व है। इजाब्स ने बांग्लादेश से पुराने तरीकों से हटने और स्वतंत्र संस्थानों, मानवाधिकार और जिम्मेदारियों को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

सुधार करने की अपील

इसके अलावा, इजाब्स ने आगे कहा- देश अब एक नए अहम दौर में जा रहा है। हम नई संसद और सरकार से, बाकी सभी सरकारी संस्थाओं के समर्थन से, मंजूर सुधारों को लागू करने की अपील करते हैं।

ईयू ईओएम 2025 के आखिर से बांग्लादेश में है, जिसमें ईयू सदस्य देशों, कनाडा, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के 223 इंटरनेशनल ऑब्जर्वर चुनाव के दिन सभी 64 जिलों में तैनात हैं। ईयू ईओएम बांग्लादेश में चुनाव के बाद के हालातों पर भी कड़ी निगरानी रखेगी और बाद में फाइनल रिपोर्ट देगी।