
पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान पर हमले किए। ( फोटो: AI)
Mach and Bolan districts: पाकिस्तान (Pakistan) का बलूचिस्तान प्रांत एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। मंगलवार को स्थिति उस वक्त हालात तनावपूर्ण हो गए जब पाकिस्तानी सेना ने बलूच विद्रोहियों (Baloch Rebels) के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान छेड़ दिया। मीडिया रिपोटर्स के मुताबिक, सेना ने विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों को छुड़ाने के लिए अब गनशिप हेलीकॉप्टर्स (Gunship Helicopters) और सशस्त्र ड्रोन (Armed Drones) का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई बलूचिस्तान के माच और बोलान (Bolan) इलाकों में सबसे ज्यादा देखी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 48 घंटों से विद्रोही गुटों ने कई प्रमुख सड़कों और सुरक्षा चौकियों को अपने कब्जे में ले रखा था। यह गतिरोध (Standoff) खत्म करने के लिए पाकिस्तानी सेना ने 'ऑपरेशन क्लीन-अप' शुरू किया है। चश्मदीदों का दावा है कि आसमान से भारी बमबारी की जा रही है, जिससे रिहाइशी इलाकों में भी दहशत का माहौल है।
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य अलगाववादी गुटों ने दावा किया है कि उन्होंने सेना के कई हमलों को नाकाम कर दिया है। विद्रोहियों का कहना है कि वे अपने संसाधनों और अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। भारी गोलीबारी के कारण क्वेटा और आसपास के इलाकों का संपर्क बाकी देश से कटने के कगार पर है।
हमेशा की तरह, पाकिस्तानी प्रशासन ने ऑपरेशन शुरू करते ही इलाके में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं ठप कर दी हैं। मीडिया को संघर्ष वाले इलाकों में जाने से रोक दिया गया है। मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है कि 'ब्लैकआउट' की आड़ में आम नागरिकों को निशाना बनाया जा सकता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, धमाकों की आवाजें कई किलोमीटर दूर तक सुनी जा रही हैं।
पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है, "आतंकवादियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। राज्य की रिट (Writ) बहाल करने के लिए सेना को पूरी छूट दी गई है।" दूसरी तरफ, बलूच एक्टिविस्ट्स ने इसे "नरसंहार" करार दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि पाकिस्तान को अपने ही नागरिकों पर एयर स्ट्राइक करने से रोका जाए।
ताजा जानकारी के मुताबिक, सेना ने कुछ इलाकों में कमांडो उतार दिए हैं। आने वाले 24 घंटे बहुत अहम माने जा रहे हैं। अगर विद्रोही पीछे नहीं हटते हैं, तो संघर्ष और भीषण हो सकता है। अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है, लेकिन डॉक्टरों और दवाओं की भारी कमी बताई जा रही है।
इस भारी भरकम ऑपरेशन के पीछे चीन का दबाव भी माना जा रहा है। बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के कई प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। पिछले कुछ समय से बलूच विद्रोहियों ने चीनी नागरिकों और प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाया है। बीजिंग की नाराजगी से बचने के लिए पाकिस्तानी सेना ने यह आक्रामक रुख अपनाया है।
Published on:
04 Feb 2026 06:18 pm
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