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ईरान संकट: भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑपरेशन सुरक्षा’ शुरू, जानें तेहरान से दिल्ली तक का पूरा हाल

India Evacuation Iran:ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत ने 'ऑपरेशन सिंधु' के तहत भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी शुरू की है। पहले विमान की लैंडिंग के बाद अब दूसरे विमान की बारी है।

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भारत

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MI Zahir

Jan 16, 2026

Operation sindhu Iran

ईरान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए मुहिम शुरू। (फोटो: AI Generated)

Operation Sindhu Iran: पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा बचाव अभियान शुरू किया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के मद्देनजर विदेश मंत्रालय ने न केवल एडवाइजरी जारी की है, बल्कि वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित वतन वापस लाने के लिए 'ऑपरेशन सुरक्षा' (Operation Suraksha) का आगाज भी कर दिया है। भारत सरकार ने ईरान में बिगड़ते हालात के बीच मिशन मोड में काम शुरू किया है। विदेश मंत्रालय ने इस पूरे रैस्क्यू अभियान को 'ऑपरेशन सुरक्षा' का नाम दिया है। इस मुहिम के तहत पहले विशेष विमान के जरिये करीब 220 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित दिल्ली लाया गया है। वहीं, दूसरा विमान (C-17 ग्लोबमास्टर) ईरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भर चुका है और इसके शुक्रवार देर रात तक हिंडन एयरबेस पहुंचने की संभावना है।

ईरान में कितने भारतीय और क्या है उनकी स्थिति ?

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईरान में लगभग 12,000 से 15,000 भारतीय रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र, आईटी पेशेवर और व्यापारी शामिल हैं। वर्तमान में करीब 4,000 भारतीय ईरान के ऐसे क्षेत्रों में फंसे हुए हैं जहां प्रदर्शन और सैन्य हलचल सबसे अधिक है। विदेश मंत्रालय इन सभी के संपर्क में है और प्राथमिकता के आधार पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को पहले निकाला जा रहा है।

विदेश मंत्रालय की सक्रियता और कंट्रोल रूम

भारत का विदेश मंत्रालय इस समय 'हाई अलर्ट' पर है। दिल्ली में एक विशेष 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की जान बचाना है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है, ताकि भारतीयों को हवाई अड्डे तक पहुंचने में कोई बाधा न आए।

एयरस्पेस बंदी और नौसेना का पहरा

तनाव के कारण एयर इंडिया और इंडिगो जैसी प्रमुख एयरलाइनों ने ईरानी हवाई क्षेत्र (Airspace) का उपयोग करना बंद कर दिया है। अब भारतीय विमान लंबी दूरी तय कर वैकल्पिक रास्तों से यूरोप और खाड़ी देशों की यात्रा कर रहे हैं। दूसरी ओर, भारतीय नौसेना ने अरब सागर में अपनी चौकसी बढ़ा दी है। नौसेना के युद्धपोत उन 16 भारतीय नाविकों को छुड़ाने के लिए तैयार हैं, जिन्हें खाड़ी के पास एक व्यापारिक जहाज पर बंधक बनाया गया था।

वैश्विक और घरेलू प्रतिक्रिया

भारतीय परिवार: वतन लौटे नागरिकों के परिवारों ने राहत की सांस ली है और सरकार की त्वरित कार्रवाई की प्रशंसा की है।

विपक्षी दल: विपक्ष ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही मांग की है कि बाकी बचे भारतीयों को भी जल्द से जल्द निकाला जाए।

विशेषज्ञ: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 'ऑपरेशन सुरक्षा' भारत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति का परिचायक है, क्योंकि भारत दोनों पक्षों (ईरान-अमेरिका) से संवाद बनाए हुए है।

भारत 'समुद्री मार्ग'का उपयोग कर सकता है

अगले 72 घंटों में तीन और विशेष विमान ईरान भेजे जाने की योजना है। यदि ईरान अपनी हवाई सीमा को पूरी तरह बंद करता है, तो भारत 'समुद्री मार्ग' (Sea Route) का उपयोग कर सकता है, जिसके लिए चाबहार पोर्ट को बेस बनाया जा सकता है। नौसेना के विशेष कमांडो नाविकों को छुड़ाने के लिए किसी भी समय ऑपरेशन शुरू कर सकते हैं।

चाबहार पोर्ट और भारत के हित

ईरान में तनाव का सीधा असर भारत के चाबहार पोर्ट परियोजना पर पड़ सकता है। यह पोर्ट भारत के लिए मध्य एशिया का प्रवेश द्वार है। यदि यहां युद्ध होता है, तो भारत का करोड़ों डॉलर का निवेश खतरे में पड़ सकता है। साथ ही, ईरान से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है, जो सरकार के लिए एक नई चुनौती होगी।