
भारत ने नेपाल को चुनाव सहायता की पहली किस्त प्रदान की। (फोटो: X Handle/ @sidhant)
Nominations: हिमालयी देश नेपाल में एक बार फिर सियासी सरगर्मियां (Himalayan Democracy Shift) चरम पर है। पिछले दिनों हुए 'जी-जेन' (Gen-Z Political Movement) विद्रोह के बाद देश की राजनीति की चूलें हिल गई थीं, अब सबकी नजरें मार्च में होने वाले प्रतिनिधि सभा के चुनावों पर टिकी हुई हैं। उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुकी है और अब चुनावी जंग जमीनी स्तर पर शुरू होने जा रही है। यह चुनाव (Nepal Midterm Elections 2026) महज एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नेपाल के भविष्य का नया अध्याय माना जा रहा है। नेपाल की सड़कों पर इन दिनों रैलियों और नारों का बहुत शोर है। देश भर के 165 निर्वाचन क्षेत्रों में 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' (FPTP) प्रणाली के तहत सैकड़ों उम्मीदवारों ने अपने पर्चे भरे (Kathmandu Parliament Polls) हैं। प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ-साथ इस बार निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या ने भी सबको चौंका दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार पारंपरिक दलों का मुकाबला केवल एक-दूसरे से नहीं, बल्कि उस युवा आक्रोश से भी है, जो बदलाव की मांग कर रहा है। इसके अतिरिक्त, समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) प्रणाली के तहत भी 110 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची पहले ही सौंपी जा चुकी है, जिससे यह बात साफ है कि हर दल सत्ता में अपनी हिस्सेदारी पक्की करना चाहता है।
गौरतलब है कि नेपाल में यह मध्यावधि चुनाव सामान्य परिस्थितियों में नहीं हो रहे हैं। पिछले महीनों में देश ने 'Gen-Z' आंदोलन की वह लहर देखी, जिसने मौजूदा व्यवस्था को चुनौती दी थी। युवाओं के इस आंदोलन ने न केवल सरकार को समय से पहले चुनाव कराने पर मजबूर किया, बल्कि राजनीतिक एजेंडा भी बदल दिया है। अब चुनावी रैलियों में पुराने वादों के बजाय डिजिटल इकोनॉमी, रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन जैसे मुद्दे छाए हुए हैं।
जैसे-जैसे मार्च की मतदान तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे पार्टियों ने जनता को लामबंद करने के लिए अपना घोषणा पत्र और रोडमैप पेश करना शुरू कर दिया है। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चुनाव यह तय करेगा कि नेपाल अपनी पुरानी राजनीतिक अस्थिरता के रास्ते पर रहेगा या युवा ऊर्जा के साथ एक नए लोकतंत्र की ओर कदम बढ़ाएगा।
बहरहाल, उम्मीदवारों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती मतदाताओं का भरोसा जीतना है, खासकर उन युवाओं का, भरोसा, जो पहली बार मतदान करेंगे और जिनके लिए देश की राजनीति में सक्रिय भागीदारी का मतलब केवल सोशल मीडिया तक सीमित होना नहीं रह गया है।
Updated on:
22 Jan 2026 04:19 pm
Published on:
22 Jan 2026 04:18 pm
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