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Oil Prices: ईरान युद्ध के बीच तेल बाजार में बड़ी उथल-पुथल, कीमतों में 15% से ज्यादा गिरावट

कई बड़े देशों ने संकेत दिए हैं कि वे ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए कदम उठा सकते हैं। इसी वजह से निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई और कीमतों में तेजी से गिरावट आई।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 11, 2026

Oil Prices

Oil Prices(AI Image-ChatGpt)

Oil Prices: पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध का असर अब सीधे वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार, 10 मार्च को कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड करीब 15 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। सोमवार को भी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। एक ही दिन में तेल की कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर करीब 84 डॉलर तक आ गई थीं। यानी लगभग 35 डॉलर का उतार-चढ़ाव। डॉलर के हिसाब से देखें तो यह कच्चे तेल की कीमतों में एक दिन के भीतर दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।

बाजार स्थिर रखने के लिए कदम उठाने की पहल


दरअसल, कई बड़े देशों ने संकेत दिए हैं कि वे ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए कदम उठा सकते हैं। इसी वजह से निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई और कीमतों में तेजी से गिरावट आई। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने बताया कि हालात को देखते हुए उन्होंने सदस्य देशों की एक “आपात बैठक” बुलाई है। इस बैठक में यह आकलन किया जा रहा है कि मौजूदा संकट का तेल बाजार पर कितना असर पड़ सकता है और उससे निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाएं।

तेल भंडार का किया जा सकता है इस्तेमाल


इस बीच जी-7 देशों ने भी IEA से कहा है कि अगर जरूरत पड़े तो आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की संभावनाओं पर योजना तैयार रखी जाए। यानी अगर सप्लाई में ज्यादा बाधा आती है, तो इन भंडारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही यह संकेत दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को अमेरिकी नौसेना सुरक्षा दे सकती है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।

Oil Prices: साल की शुरुआत के मुकाबले तेल अभी भी महंगा


हालांकि कीमतों में ताजा गिरावट जरूर आई है, लेकिन साल की शुरुआत के मुकाबले तेल अभी भी करीब 40 प्रतिशत महंगा बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने जैसी स्थिति है। इस मार्ग पर तनाव बना रहने से कई तेल उत्पादक देश उत्पादन और सप्लाई को लेकर सतर्क हो गए हैं।एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक ईरान युद्ध और क्षेत्रीय तनाव कम नहीं होता, तब तक तेल बाजार में ऐसी अस्थिरता बनी रह सकती है। कभी कीमतें तेजी से ऊपर जाएंगी, तो कभी अचानक नीचे आ सकती हैं। फिलहाल दुनिया की नजर इसी पर टिकी है कि पश्चिम एशिया की स्थिति आगे किस दिशा में जाती है।