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‘ट्रंप ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया!’ पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बड़ा कबूलनामा

रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पाकिस्तान को अपने सामरिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, हमने अमेरिका के लिए क्या नहीं किया? फिर भी हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया गया।

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Khawaja Asif

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में अमेरिका पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को टॉयलेट पेपर (या उससे भी बदतर टिशू पेपर) की तरह इस्तेमाल किया और फिर फेंक दिया। 10 फरवरी 2026 को संसद में दिए बयान में आसिफ ने अफगानिस्तान युद्धों में पाकिस्तान की भूमिका पर गहरा पछतावा जताया। उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका के दबाव में तालिबान के खिलाफ जंग लड़ी, जिसकी कीमत आज भी चुकानी पड़ रही है।

अफगान युद्धों में पाकिस्तान का 'मोहरा' बनना

ख्वाजा आसिफ ने कहा कि 1980 के दशक में रूस के खिलाफ अफगानिस्तान में विद्रोह को अमेरिका ने बढ़ावा दिया। तालिबान ने इसे जिहाद का नाम दिया, लेकिन यह जिहाद नहीं था। पाकिस्तान ने अपने लोगों को इसमें शामिल किया, जिसकी वजह से शैक्षिक पाठ्यक्रम बदले गए-जिन्हें आज तक सुधारा नहीं जा सका। 2001 में अमेरिका के लिए पाकिस्तान तालिबान के खिलाफ हो गया। आसिफ ने पूर्व सेना प्रमुखों जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ की आलोचना की कि उन्होंने अमेरिका की 'बैसाखियों' के लिए देश को इन युद्धों में झोंक दिया। अमेरिका चला गया, लेकिन पाकिस्तान को आतंकवाद, आर्थिक नुकसान और अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।

'अमेरिका ने जंगें शुरू कीं, हमने कीमत चुकाई'

रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पाकिस्तान को अपने सामरिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, "हमने अमेरिका के लिए क्या नहीं किया? फिर भी हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया गया।" आसिफ ने यह भी कहा कि पुरानी सरकारों को अमेरिकी समर्थन चाहिए था, इसलिए वे इन फैसलों में शामिल हुईं। अब पाकिस्तान को इन गलतियों की भरपाई करनी पड़ रही है।

ट्रंप का जिक्र और अमेरिका-पाक संबंध

हालांकि बयान में डोनाल्ड ट्रंप का सीधा नाम नहीं लिया गया, लेकिन संदर्भ ट्रंप युग के दौरान अमेरिका-पाकिस्तान तनाव से जुड़ा है। ट्रंप ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को पनाह देने का आरोप लगाया था और सहायता रोक दी थी। आसिफ के बयान से लगता है कि पाकिस्तान अब अमेरिका पर भरोसा खो चुका है और खुद को 'उपयोग और फेंक' की नीति का शिकार मान रहा है।

पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल

यह बयान पाकिस्तान की विदेश नीति की गलतियों को उजागर करता है। रक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि अफगानिस्तान से जुड़े फैसलों ने देश को दूसरों के युद्धों में मोहरा बना दिया। अब पाकिस्तान आंतरिक सुधारों और नई रणनीति की जरूरत महसूस कर रहा है। आसिफ के इस कबूलनामे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छेड़ दी है, जहां पाकिस्तान को अमेरिका का 'पुराना सहयोगी' माना जाता था।